गोभी वर्गीय सब्जियों की खेती

गोभी वर्गीय सब्जियों की खेती कैसे करें, जानिए उन्नत तकनीक

सर्दी के मौसम में गोभी वर्गीय सब्जियों की खेती का प्रमुख स्थान हैं, जिनमें फूल गोभी व पत्ता गोभी मुख्य फसल के साथ गांठ गोभी, ब्रुसेल्स स्प्राउट व ब्रोकली महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं| इनमें विटामिन ए, सी और प्रोटीन पर्याप्त मात्रा में होता हैं, सब्जी के अलावा इनका उपयोग सूप तथा आचार बनाने के लिए भी किया जाता हैं| किसान बन्धु गोभी वर्गीय सब्जियों की वैज्ञानिक तकनीक से खेती कर के इनसे अधिकतम उत्पादन प्राप्त कर सकते है| इस लेख द्वारा गोभी वर्गीय सब्जियों की उन्नत खेती कैसे करें और उन्नत किस्मों, फसल की देखभाल तथा पैदावार की जानकारी का उल्लेख है| गोभी वर्गीय सब्जियों की जैविक खेती की पूरी जानकारी के लिए यहाँ पढ़ें- गोभी वर्गीय सब्जियों की जैविक खेती, जानिए उपयोगी एवं आधुनिक जानकारी

उपयुक्त जलवायु

गोभी वर्गीय सब्जियों की खेती के लिए ठण्डी नम जलवायु की आवश्यकता होती हैं| अधिक तापमान होने पर गोभी वर्गीय सब्जियों की फसलों की गुणवता खराब हो जाती हैं| इनके बीज अंकुरण के लिए उपयुक्त मिटटी का ताप 12.8 से 15.6 डिग्री सेल्सियस आर्दश रहता है|

भूमि का चयन

गोभी वर्गीय सब्जियों की खेती वैसे तो लगभग हर प्रकार की भूमि में की जा सकती है| लेकिन बलुई दोमट मिटटी इनकी खेती के लिए उत्तम रहती हैं, जिसमें पोषक तत्वों तथा जीवांश की पर्याप्त मात्रा के साथ नमी धारण क्षमता भी अच्छी होनी चाहिए|

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उन्नत किस्में

फुल गोभी-

अगेती किस्में- अर्ली कुंआरी, पूसा कातकी, पूसा दीपाली, पूसा अर्ली सिंथेटिक आदि प्रमुख किस्में हैं, इनकी बुवाई मई से जून के अन्त तक की जाती है|

मध्यम किस्में- इम्प्रुव्ड जापानीज, पुसा हाइब्रिड- 2, पूसा हिम ज्योति आदि प्रमुख किस्में हैं, इसकी बुवाई जुलाई से अगस्त तक की जाती हैं|

पिछेती किस्में- स्नोबाल-16, पूसा स्नोबाल, के- 1, हिसार- 1, डानिया आदि प्रमुख किस्में हैं, इनकी बुवाई सितम्बर से मध्यम अक्टूम्बर तक की जाती हैं|

पत्ता गोभी-

अगेती किस्में- प्राइड ऑफ इण्डिया, गोल्डन एकर एवं मित्रा (संकर) आदि प्रमुख किस्में हैं, इनकी बुवाई का समय सितम्बर माह हैं|

पिछते किस्में- पूसा ड्रम हैड, लेट ड्रम हैड, सलेक्शन- 8, हाईब्रिड- 10 (संकर) आदि प्रमुख किस्में हैं, इनके बोने का समय अक्टूम्बर माह हैं|

गांठ गोभी-

अगेती किस्में- अर्ली परप वियना, अर्ली व्हाइट वियना प्रमुख है|

मध्यवर्ती- किंग ऑफ नॉर्थ प्रमुख है|

पछेती- लार्ज ग्रीन प्रमुख है|

ब्रसेल्स स्प्राउट-

लम्बी किस्में- केम्ब्रीज नं- 3,4,5, डेनिश प्राइज अमाजेल मारकेट प्रमुख है|

बौनी किस्में- इम्प्रुव्ड कीरक, जड-कोश व रूबीना प्रमुख है|

अन्य- सोनारा, रोगर, राइडर, स्टेफन प्रमुख है|

स्प्राउटेड ब्रोकली-

प्रमुख किस्मे- पालम समृद्धि, पंजाब, ब्रोकली, पूसा ब्रोकली आदि प्रमुख है|

गोभी वर्गीय सब्जियों की किस्मों का चुनाव करते समय विशेष ध्यान देने योग्य बात हैं, कि यदि पिछेती किस्मों को जल्दी बोया जाय तो पत्तों की वृद्धि ज्यादा होगी और अगेती को देर से बोया जाये तो उनका खाये जाने वाला फल छोटा रह जाता हैं|

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खेत एवं नर्सरी तैयार करना

गोभी वर्गीय सब्जियों की पौध तैयार करने के लिए बीजों की बुवाई 10 से 15 सेंटीमीटर उठी हुई क्यारियों में की जाती हैं| क्यारियों के लिए उपजाऊ और अच्छे जल निकाल वाली भूमि का चयन करना चाहिए| बुवाई से पूर्व बीजों को कैप्टान या थाइम 2 से 3 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज दर से उपचारित करना चाहिए| भूमि की 3 से 4 जुताई करना चाहिए, पहली जुताई मिटटी पलटने वाले हल से की जाती है, फिर देशी खाद बिखेर कर भूमि की जुताई करते हैं एवं मिटटी भूरभूरी करके पाटे की सहायता से समतल कर लेते हैं|

खेत में उचित आकार की क्यारियां तथा नालियां बना लेते हैं| पौधे रोपाई से पूर्व प्रति हैक्टेयर डेढ किलोग्राम क्लूक्लोरोलिन और 2 से 3 किलोग्राम वासालिन का छिडकाव करें या 300 से 400 ग्राम आक्सीफ्लूरेफेन भूमि में मिलावें तत्पश्चात् फसल की 45 दिन की अवस्था पर एक गुड़ाई करें| बुवाई के 4 से 6 सप्ताह बाद पौध रोपाई योग्य हो जाती है| रोपने से पूर्व पौध को एजोटोबैक्टर कल्चर के घोल में 15 मिनट डुबोकर फिर रोपाई करना लाभप्रद होता है|

खाद एवं उर्वरक

गोभी वर्गीय सब्जियों की खेती हेतु खेत की तैयारी के समय 250 से 300 क्विंटल अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद भूमि में मिला दें| इसके अतिरिक्त 120 से 150 किलोग्राम नत्रजन, 80 किलोग्राम फास्फोरस और 60 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से देवें| नत्रजन की आधी मात्रा तथा फास्फोरस व पोटाश की पूरी मात्रा पौध लगाने से पूर्व भूमि में मिला देते है| बची हुई नत्रजन की मात्रा पौध लगाने के 6 सप्ताह बाद देते है|

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सिंचाई एवं निराई गुडाई

गोभी वर्गीय सब्जियों की पौध लगाने के तुरन्त बाद हल्की सिंचाई कर देनी चाहिए, बाद में आवश्यकतानुसार समय-समय पर सिंचाई करते रहे| हल्की मिट्टी में 5 से 6 दिन बाद तथा भारी मिट्टी में 8 से 10 दिन बाद सिंचाई करनी चाहिए| खेत में खरपतवार की वृद्धि रोकने के लिए निराई गुडाई करना आवश्यक हैं, फसल में 2 से 3 बार निराई-गुडाई करने की आवश्यकता पड़ती हैं| रोपाई के 4 से 5 सप्ताह बाद पौध पर मिट्टी चढाए, जिससे बढ़वार अच्छी होती है|

कीट रोकथाम

पत्ती भक्षक कीट- इसमें आरा मक्खी, फली बीटल, पत्ती भक्षक लटें, हीरक तितली और गोभी की तितली मुख्य हैं| ये कीट पत्तियों को खाकर नुकसान पहुंचाते है|

रोकथाम- नियंत्रण हेतु फूल बनने से पूर्व मैलाथियान 5 प्रतिशत या कार्बोरिल 5 प्रतिशत के 20 किलोग्राम चूर्ण का प्रति हैक्टेयर की दर से भुरकाव करना चाहिए| एक मिलीलीटर मैथाथियॉन 50 ई सी का प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें| हीरक तितली के लिए कीटनाशी का महिन बूंदों के रूप में छिड़काव करना उत्तम पाया गया हैं| आवश्यकतानुसार छिड़काव 15 दिन के बाद दोहरावें|

मोयला- गोभी वर्गीय सब्जियों की फसल में ये कीट पत्तियों से रस चूसते हैं, जिससे पत्तियां पीली पड़ जाती हैं|

रोकथाम- नियंत्रण हेतु कार्बोरिल 5 प्रतिशत चूर्ण का 20 से 25 किलोग्राम प्रति हेक्टयेर की दर से भुरकाव करें या मैलाथियान 50 ई सी एक मिलीलीटर का प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें|

डाइमंड ब्लैक मोथ- बीटी के (बेसिलस थूरीन्जेसिस कस्टकी) 500 मिलीलीटर प्रथम रोपण के 25 दिन बाद और दूसरा इसके 10 दिन बाद करें| अन्तिम छिडकाव फसल काटने के 4 सप्ताह पूर्व करें अथवा स्पाईनोसेड 25 एस सी 15 ग्राम सक्रिय तत्व प्रति हेक्टेयर की दर से 3 बार छिड़काव करें या प्रोफेनोस 40 ई सी 1000 से 1500 मिलीलीटर प्रति हैक्टेयर या बुलडाक 0.25 एस सी 760 से 1000 मिलीलीटर प्रति हैक्टेयर की दर से छिडकाव अत्यन्त उपयुक्त पाये गये है|

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रोग रोकथाम

भूरी गलन या लाल सड़न- यह रोग बोरोन तत्व की कमी के कारण होता है| गोभी के फूलों पर गोल आकार के भूरे रंग के धब्बे पड़ जाते है, जो बाद में फूल को सड़ा देते हैं

रोकथाम- नियंत्रण हेतु रोपाई से पूर्व खेत अकारला या लालक छन युक्त में 10 से 15 किलोग्राम बोरेक्स प्रति हेक्टेयर के हिसाब से प्रयोग करना चाहिए या फसल पर 0.2 से 0.3 प्रतिशत बोरेक्स के घोल का छिड़काव करना चाहिए|

आर्दै गलन- यह रोग गोभी की अगेती किस्मों में नर्सरी अवस्था में होता है| जमीन की सतह पर स्थित तने का भाग काला पडकर कमजोर हो जाता हैं और नन्हे पौधे गिरकर मरने लगते हैं|

रोकथाम- नियंत्रण के लिए बुवाई से पूर्व बीजों को थाइरम या कैप्टान 3 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करना चाहिए| रोग के लक्षण दिखाई देने पर बोर्डो मिश्रण 2:2:5 या कॉपर ऑक्सी क्लोराइड 3 ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल का छिडकाव करें|

काला सड़न- पौधों की पत्तियों की शिराएं काली दिखाई देती है| उग्रावस्था में यह रोग गोभी के अन्य भागों पर भी दिखाई देता हैं, जिससे फूल के डंठल अन्दर से काले होकर सडने लगते हैं|

रोकथाम- नियंत्रण के लिए बीजों को बुवाई से पूर्व स्ट्रप्टोसाइक्लिन 250 मिलीग्राम या बाविस्टीन एक ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल में 2 घन्टे उपचारित कर छाया में सुखाकर बुवाई करें| पौध रोपण के पूर्व पौध की जड़ों को स्ट्रेप्टोसाइक्लिन और बाविस्टीन के घोल में एक घंटे तक डुबोकर लगावें तथा फसल में रोग के लक्षण दिखने पर उपरोक्त दवाओं का छिड़काव करें|

झुलसा- इस रोग से पत्तियों पर गोल आकार के छोटे से बड़े भूरे धब्बे बन जाते हैं और उनमें छल्लेनुमा धारियां बनती हैं, अन्त में धब्बे काले रंग के हो जाते हैं|

रोकथाम- नियंत्रण के लिए जाइनेब या मैकोजेब 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए| छिडकाव आवश्यकता अनुसार 5 दिन के अन्तराल पर दोहरावें| गोभी वर्गीय सब्जियों में कीट एवं रोग नियंत्रण की अधिक जानकारी के लिए यहाँ पढ़ें- गोभी वर्गीय सब्जी की फसलों में समेकित नाशीजीव प्रबंधन कैसे करें

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तुडाई और पैदावार

फूल गोभी- समुचित आकार के सफेद और ठोस फूलों को तोड़ लेना चाहिए| अगेती फसल से 150 से 220 क्विंटल तथा मध्य व पछेती फसल से 200 से 350 क्विंटल प्रति हैक्टेयर उत्पादन होता हैं|

पत्ता गोभी- ठोस तथा पूर्ण विकसित पत्तागोभी तुडाई के योग्य मानी जाती हैं| अगेती फसल से पैदावार प्रति हैक्टयर 200 से 300 क्विंटल और पछेती किस्मों से 300 से 400 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती हैं|

गांठगोभी- जब नोब 5 से 7 सेंटीमीटर व्यास की हो तब विपणन हेतु ठीक रहती हैं| औसत उपज 200 से 270 क्विंटल प्रति हैक्टयेर तक होती हैं|

ब्रसेल्स स्प्राउट- जब छोटी गॉठे पूर्ण विकसित और ठोस हो तो तुडाई के योग्य मानी जाती है, औसत उपज 100 से 175 क्विंटल प्रति हैक्टयेर तक होती हैं|

स्प्राउटेड ब्रोकली- जब तना 10 से 15 सेंटीमीटर लम्बा हो तब फसल की तुडाई करानी चाहिए, प्रति हेक्टर औसत उपज 100 से 150 क्विंटल तक होती है|

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खेती से बीजोत्पादन

विभिन्न गोभी वर्गीय सब्जियों की खेती में से फूलगोभी ही एक ऐसी फसल हैं, जिसका बीज उत्पादन मैदानी इलाकों में किया जा सकता है, अन्य का समशीतोष्ण जलवायु वाले क्षेत्र ही बीजोत्पादन के लिए उपयुक्त हैं| किसान साधारण तौर पर फूलगोभी की अगेती तथा मध्यकालीन किस्में एक निश्चित पृथक्करण दूरी 800 से 1000 मीटर रखकर फसल लेते हैं| खेत में फसल के फूलों को काटते नहीं है और फसल की उचित सिंचाई तथा अन्य देखभाल करते रहते हैं|

समय आने पर इन फूलो से ऊपर की शाखाएं निकलना प्रारम्भ होती हैं, इन्हें बोल्टर कहते हैं| इन्हीं शाखाओं पर फलियों में बीज लगते हैं| जब फलियां पीली पड़ने लग जाए तो फसल काटकर धूप में मढाई करके बीज अलग कर लें| इस प्रकार 4 से 5 क्विंटल बीज प्रति हेक्टेयर प्राप्त हो जाते है| गोभी वर्गीय सब्जियों की खेती से बीज उत्पादन की पूरी जानकारी के लिए यहाँ पढ़ें- गोभी वर्गीय सब्जियों का बीजोत्पादन कैसे करें

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