गोभी वर्गीय या कोल फसलें यानि की बंदगोभी, फूलगोभी, ब्रोकली, गाँठगोभी तथा ब्रुसेल्स स्प्राउट भारत में सर्दियों की सबसे प्रमुख सब्जियां हैं| गोभी वर्गीय सब्जियों के गुणवत्तापूर्वक उत्पादन में नर्सरी से कटाई उपरांत तक विभिन्न बीमारियों जैसे मृदुरोमिल आसिता, आर्द्र पतन, काले सड़न या ब्लैक रूट, विगलन, स्क्लेरोटिनिया तना सड़न रोग एवं अल्टरनेरिया काला धब्बा [Read More] …
गेहूं का पीला रतुआ रोग क्या है?: पीला रतुआ रोग से बचाव के उपाय
गेहूं का पीला रतुआ (Yellow rust) रोग, गेहूं के उत्पादन में विश्व स्तर पर भारत का दूसरा स्थान है और वर्ष 2014 में हमारा गेहूं उत्पादन 95.91 मिलियन टन रहा जो एक ऐतिहासिक रिकार्ड उत्पादन है| भारत की गेहूं उत्पादन में यह उपलब्धि दुनिया के विकास के इतिहास में शायद सबसे महत्वपूर्ण तथा अद्वितीय रही [Read More] …
गेहूं का करनाल बंट रोग क्या है?: करनाल बंट रोग से बचाव के उपाय
निओवोसिया इण्डिका (टिलेशिया इण्डिका) नामक कवक द्वारा ग्रसित गेहूं का करनाल बंट रोग आशिंक बंट के नाम से भी जाना जाता है| इस रोग का प्रकोप भारतवर्ष में सर्वप्रथम सन् 1931 में हरियाणा राज्य के करनाल जिले में देखा गया था| गेहूं का करनाल बंट रोग गेहूं की फसल के लिये ज्यादा हानिकारक नही होता [Read More] …
मक्का खेती के रोग की रोकथाम | मक्का में रोग नियंत्रण कैसे करें
मक्का का विश्व की कृषि में प्रमुख स्थान है| भारत में मक्का खेती का, चावल और गेहूं के बाद तीसरा स्थान है| कुछ वर्ष पहले के आकड़ों के अनुसार भारत में मक्का खेती का उत्पादन 86 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में, एवं औसत उत्पादन 212.8 लाख टन रिकार्ड किया गया| उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले [Read More] …
दीमक से विभिन्न फसलों को कैसे बचाएं | दीमक से पौधों को कैसे बचाएं
दीमक (Termite) एक खतरनाक एवं बहुजातीय कीट है| एक समूह कार्यों के आधार पर कई श्रेणियों में विभाजित होता है, जैसे- राजा, रानी, श्रमिक और सैनिक दीमक, इनमें से केवल श्रमिक दीमक ही सभी प्रकार की हानि के लिए उत्तरदायी होती हैं| ये अनके कृषि फसलों, वृक्षों, सब्जियों जैसे- गन्ना, गेहूं, मक्का, मूंगफली, जौ, चना [Read More] …
खरपतवारनाशी रसायनों के प्रयोग में सावधानियां और सतर्कता बरतें
किसान बंधुओं खरपतवारनाशी रसायन (Weed chemical) मनुष्य के शरीर में मुंह, त्वचा और श्वांस के माध्यम से प्रवेश करते हैं, जो उचित सावधानी न बरते जाने पर उपयोग कर्ता तथा वातावरण के लिए घातक सिद्ध हो सकते हैं| इसके अतिरिक्त खरपतवारनाशी रसायनों के प्रयोग करने के समय निचे लिखित सावधानियां रखनी चाहिए, जैसे- खरपतवारनाशी रसायन [Read More] …





