जड़ वाली सब्जियों में मूली, शलगम, गाजर और चुकंदर प्रमुख है| इनकी खनिज क्रियाओं में पर्याप्त समानता है, ये ठंडे मौसम की फसलें है और सभी भूमिगत होती है| जड़ वाली सब्जियों में हमें पौष्टिक तत्व, शर्करा, सुपाच्य रेशा, खनिज लवण, विटामिन्स एवं कम वसा प्राप्त होती है| इन जड़ वाली सब्जियों का उपयोग सब्जी [Read More] …
अमरूद के बागों में एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन कैसे करें
अमरूद के बागों या पौधों से नियमित और अच्छी उपज लेने के लिए यह आवश्यक होता है, कि उन्हें स्वस्थ और अच्छी हालत में रखा जाये| किसी भी पौधे को स्वस्थ रखने के लिए अनेक बातों का ध्यान रखना पड़ता है, जैसे- मिट्टी को अच्छी दशा में रखना जिससे उसकी उर्वरता दीर्घकाल तक बनी रहे, [Read More] …
गोभी वर्गीय फसलों के रोग और उनका प्रबंधन कैसे करें
गोभी वर्गीय या कोल फसलें यानि की बंदगोभी, फूलगोभी, ब्रोकली, गाँठगोभी तथा ब्रुसेल्स स्प्राउट भारत में सर्दियों की सबसे प्रमुख सब्जियां हैं| गोभी वर्गीय सब्जियों के गुणवत्तापूर्वक उत्पादन में नर्सरी से कटाई उपरांत तक विभिन्न बीमारियों जैसे मृदुरोमिल आसिता, आर्द्र पतन, काले सड़न या ब्लैक रूट, विगलन, स्क्लेरोटिनिया तना सड़न रोग एवं अल्टरनेरिया काला धब्बा [Read More] …
गेहूं का पीला रतुआ रोग क्या है?: पीला रतुआ रोग से बचाव के उपाय
गेहूं का पीला रतुआ (Yellow rust) रोग, गेहूं के उत्पादन में विश्व स्तर पर भारत का दूसरा स्थान है और वर्ष 2014 में हमारा गेहूं उत्पादन 95.91 मिलियन टन रहा जो एक ऐतिहासिक रिकार्ड उत्पादन है| भारत की गेहूं उत्पादन में यह उपलब्धि दुनिया के विकास के इतिहास में शायद सबसे महत्वपूर्ण तथा अद्वितीय रही [Read More] …
गेहूं का करनाल बंट रोग क्या है?: करनाल बंट रोग से बचाव के उपाय
निओवोसिया इण्डिका (टिलेशिया इण्डिका) नामक कवक द्वारा ग्रसित गेहूं का करनाल बंट रोग आशिंक बंट के नाम से भी जाना जाता है| इस रोग का प्रकोप भारतवर्ष में सर्वप्रथम सन् 1931 में हरियाणा राज्य के करनाल जिले में देखा गया था| गेहूं का करनाल बंट रोग गेहूं की फसल के लिये ज्यादा हानिकारक नही होता [Read More] …
मक्का खेती के रोग की रोकथाम | मक्का में रोग नियंत्रण कैसे करें
मक्का का विश्व की कृषि में प्रमुख स्थान है| भारत में मक्का खेती का, चावल और गेहूं के बाद तीसरा स्थान है| कुछ वर्ष पहले के आकड़ों के अनुसार भारत में मक्का खेती का उत्पादन 86 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में, एवं औसत उत्पादन 212.8 लाख टन रिकार्ड किया गया| उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले [Read More] …





