टमाटर की जैविक फसल को बहुत से हानिकारक कीट एवं रोग प्रभावित करते है| जिससे टमाटर फसल में उपज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है| प्रमुख कीट- कटवा कीड़ा, फल छेदक, फल मक्खी, माईट, सफेद मक्खी, सुरंगी कीड़ा, जड़ गांठ, सूत्रकृमि आदि है, वही प्रमुख रोग-,कमर तोड़ रोग, फल सड़न रोग, पछेती झुलसा रोग, पत्तों का [Read More] …
ग्रीनहाउस में टमाटर की बेमौसमी खेती कैसे करें; जाने वैज्ञानिक विधि
हमारे देश के अधिकतर ग्रामीण युवक जिनकी रुचि आज सामान्य खेती करने में नहीं है, उनको ग्रीनहाउस (पॉली हाउस) जैसी नवीनतम खेती की तरफ आकर्षित करना संभव है| आज देश के बडे शहरों और विदेशों में उच्च गुणवत्ता वाली सब्जियों की मुख्य मौसम से पहले व बेमौसमी बढती मांग को देखते हुए भी इस प्रकार [Read More] …
टमाटर बीज का उत्पादन कैसे करें? | टमाटर का बीज कैसे तैयार करें?
टमाटर की अधिक उपज प्राप्त करने के लिए स्वस्थ टमाटर बीज का अपना महत्व है| क्योंकि हमारे देश की कृषि व्यवस्था में फसल विविधता को बढ़ावा देने, भूमि उपयोग सुधारने, रोजगार के अवसर बढ़ाने तथा जन सामान्य को पोषण सुरक्षा प्रदान करने में सब्जी क्षेत्र की अपनी विशेष उपयोगिता है| खेती तथा उपयोगिता की दृष्टि [Read More] …
पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्व और उनकी कमी के लक्षण
पौधों की उचित बढ़वार और जीवन-चक्र सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए मुख्य तौर पर 16 तत्वों की आवश्यकता होती है, जिसमें से कार्बन, आक्सीजन व हाइड्रोजन वायु तथा पानी से, शेष 13 तत्व भूमि से प्राप्त करते हैं| पोषक तत्वों को पौधों के लिये आवश्यक मात्रा के अनुसार निम्न प्रकार वर्गीकृत किया जाता है, जैसे- [Read More] …
टमाटर की फसल में समेकित नाशीजीव प्रबंधन कैसे करें
हमारे देश में उगाई जाने वाली विभिन्न प्रकार की सब्जियों में टमाटर की फसल का प्रमुख स्थान है| यह लोगों के भोजन का प्रमुख अंग होने के अतिरिक्त, किसानों की आय बढ़ाने में भी मुख्य भूमिका निभाती है| टमाटर की खेती के अन्तर्गत आने वाला क्षेत्रफल 0.86 मिलियन हैक्टेयर है, लेकिन उत्पादकता स्तर काफी कम [Read More] …
टमाटर में एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन कैसे करें; अच्छे उत्पादन हेतु
टमाटर में एकीकृत पोषक तत्व (खाद व उर्वरक) प्रबन्ध संतुलित मात्रा में खाद और उर्वरकों के प्रयोग करने की वह आधुनिक विधि है| जिसमें रासायनिक उर्वरकों के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कार्बनिक खाद तथा जैविक खाद का प्रयोग इस अनुपात में किया जाता है, कि पैदावार अधिक लाभप्रद और टिकाऊ हो| इसके साथ ही [Read More] …





