सफेद मूसली (Safed Musli) को विभिन्न भाषाओं में भिन्न-भिन्न नाम से जाना जाता है| एक अनुमान के अनुसार विश्वभर में सफेद मूसली की मांग 35,000 टन प्रति वर्ष है, जबकि उत्पादन या उपलब्धता मात्र 5000 टन ही है| एक-डेढ़ फीट ऊँचाई के इस पादप की जड़ें औषधीय महत्व की हैं| व्यावसायिक रुप से इसकी खेती [Read More] …
सर्पगंधा की उन्नत खेती: किस्में, रोपाई, सिंचाई, देखभाल और पैदावार
सर्पगंधा (Sarpagandha) एपोसाइनेसी कुल का पौधा है| सर्पगंधा की कई प्रजातियाँ होती हैं| जिसमें राउभोलफिया सरपेनटिना एवं राउभोलफिया टेट्राफाइलस प्रजाति के पौधों को औषधीय पौधों के रूप में उगाया जाता है| सर्पगंधा की जड़ औषधि के रूप में प्रयोग में लाये जाती हैं| इसके पौधे की ऊँचाई 30 से 75 सेंटीमीटर तक की होती है| [Read More] …
काजू की खेती: किस्में, रोपाई, सिंचाई, पोषक तत्व, देखभाल, पैदावार
काजू एक प्रमुख बागवानी फसल है| जिसकी मुख्य रूप से केरळा, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटका, तमिळनाडु, आंद्रप्रदेश और ओडिशा में खेती की जा रही है| पश्चिम बंगाल, छत्तीसगड़, गुजरात तथा उत्तर-पूर्वी प्रदेशों में इसे कुछ क्षेत्रों में उगाया जाता है| लोकप्रिय नाश्तावों में उपयोग के साथ साथ काजू को आईसक्री, पेस्ट्री तथा मिठाईयो में भी इस्तमाल [Read More] …
लीची के पौधे कैसे तैयार करें? | लीची के पौधे तैयार करने की विधियां?
लीची के पौधे बीज तथा कायिक प्रवर्धन द्वारा तैयार किये जा सकते हैं| बीज से तैयार पौधों में फलत 10 से 15 वर्ष बाद आती है, जो गुणों में भी अपने मातृ पौधे के समान नहीं होते तथा गुणवत्ता भी अच्छी नहीं पायी जाती है| गुणवत्ता बनाये रखने और जल्दी फलत प्राप्त करने के लिए [Read More] …
लीची में कीट एवं रोग नियंत्रण कैसे करें; जानिए समेकित उपाय
लीची के बागों में विभिन्न प्रकार के कीटों और रोगों का प्रकोप होता है| जिससे उत्पादन और गुणवत्ता प्रभावित होती है| अतः बागवानों को लीची में समय-समय पर लगने वाले कीट एवं रोगों के बारे में जानकारी होना आवश्यक हो जाता है| ताकि समय पर लीची में प्रभावी प्रबंधन किया जा सके और फलों को [Read More] …
लीची की उन्नत किस्में | लीची की सबसे अच्छी किस्में कौन सी है?
हमारे देश में उगायी जाने वाली लीची की लगभग 40 प्रजातियां हैं| किन्तु व्यावसायिक स्तर पर उत्तरी भारत में शाही, चाईना, रोज सेन्टेड, कस्बा एवं पूरवी आदि किस्मों की खेती अधिक की जाती है| इनके अतिरिक्त अर्ली बेदाना, लेट बेदाना, देशी, लौंगिया एवं कसैलिया की खेती भी छोटे स्तर पर देश के सभी क्षेत्रों में [Read More] …





