आजादी से पहले रासायनिक उर्वरको का प्रयोग नही किया जाता था या बहुत ही कम मात्रा में किया जाता था| अत: नकली एवं असली की समस्या नही थी| क्योंकि रसायनिक उर्वरकों के स्थान पर कार्बनिक और हरी खादों पर निर्भरता ज्यादा थी| आज हालात ठीक विपरीत है, अब रसायनिक खादों पर निर्भरता ज्यादा है और [Read More] …
सहजन की उन्नत खेती: किस्में, रोपाई, सिंचाई, देखभाल और पैदावार
हमारे देश में सहजन को सोजाना, साईजन, मोरिंगा और अंग्रेजी में ड्रमस्टिक नामों से अधिक जाना जाता है| यह एक लोकप्रिय सब्जी है| ड्रमस्टिक का वैज्ञानिक नाम मोरिंगा ओलीफेरा है| हिंदी में इसे साईजन, मराठी में शेवागा, तमिल में मुरुंगई, मलयालम में मुरिन्गन्गा और तेलुगु में मुनागाक्या कहते है| मोरिंगेसी फैमिली के मोरिंगा जाति के [Read More] …
लता वर्गीय सब्जियों की अगेती खेती कैसे करें; जानिए अधिक लाभ हेतु
बेल या लता वर्गीय सब्जियों जैसे लौकी, तोरई, खीरा, टिण्डा, करेला तरबूज, खरबूज, पेठा, आदि की खेती मैदानी भागों में गर्मी के मौसम में मार्च से लेकर जून तक की जाती हैं| अधिक लाभ प्राप्त करने के लिये लता वर्गीय सब्जियों की अगेती खेती की जा सकती है| जिसके लिये पॉली हाउस तकनीकी का प्रयोग [Read More] …
खस की खेती: किस्में, बुवाई, सिंचाई, पोषक तत्व, देखभाल, पैदावार
वेटिवर या खस का उद्भव स्थान भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका एवं मलेशिया माना जाता है| खस कड़ी प्रवृत्ति का घास है, जो सूखे की स्थिति एवं जल-जमाव दोनों को बर्दास्त कर लेता है| प्राचीन काल से इसके जड़ों का उपयोग तेल निकालने, चटाइयाँ बनाने एवं औषधीय उपयोग होता रहा है| दक्षिण भारतीय राज्यों में खस [Read More] …
पिप्पली की उन्नत खेती: किस्में, रोपाई, सिंचाई, देखभाल और पैदावार
पिप्पली (Pippali) को हमारे देश में अलग-अलग भाषाओँ में विभिन्न नामों से जाना जाता है, जैसे हिंदी में पीपल| यह एक गन्धयुक्त लता होती है, जो भुमि पर फैलती अथवा दूसरे वृक्षों के सहारे उपर उठती है| इसके रेंगने वाले काण्डों से उपमूल निकलते है| जिनसे इसका आरोहरण तथा प्रसारण होता है| इसकी पत्तियां पान [Read More] …
पत्थरचूर की उन्नत खेती: किस्में, रोपाई, सिंचाई, देखभाल और पैदावार
पत्थरचूर जिसे पाषाणभेद अथवा कोलियस फोर्सकोली भी कहा जाता है, उस औषधीय पौधों में से है, वैज्ञानिक आधारों पर जिनकी औषधीय उपयोगिता हाल ही में स्थापित हुई है| वर्तमान में भारतवर्ष के विभिन्न भागों जैसे तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक तथा राजस्थान में इसकी विधिवत खेती भी प्रारंभ हो चुकी है, जो काफी सफल रही है| [Read More] …





