रामतिल (Ramtil) प्रमुख तिलहनी फसल है| भारतवर्ष में इसको सरगुजा और जगनी के नाम से भी जाना जाता है| इसके तेल को खाने के अलावा दवाई के रूप में भी प्रयोग किया जाता है| किसान इसकी खेती अधिकतर कम उपजाऊ जमीन में करते हैं| इसलिए इसकी उत्पादकता काफी कम हो जाती है| यह फसल जनजातीय [Read More] …
कुसुम की खेती: किस्में, बुवाई, सिंचाई, पोषक तत्व, देखभाल, पैदावार
कुसुम (Safflower) एक औषधीय गुणों वाली तिलहनी फसल है| भारत विश्व में कुसुम का मुख्य उत्पादक देश है| इसके दानों में 30 से 32 प्रतिशत तेल पाया जाता है| यह तेल उच्च रक्तचाप तथा हृदय रोगियों के लिए लाभदायक है| अन्य खाद्य तेलों की अपेक्षा कुसुम तेल में असंतृप्त वसीय अम्ल की मात्रा अधिक होती [Read More] …
खरीफ तिलहनी फसलों की पैदावार कैसे बढ़ाएं; आधुनिक तकनीक
खाद्य तेलों की आपूर्ति बनाए रखने के लिए सरकार रबी एवं खरीफ तिलहन (Kharif oilseeds) फसलों का उत्पादन बढ़ाने पर विशेष जोर दे रही है| ताकि खाद्य तेलों की बढ़ती कीमतों, भुखमरी व कुपोषण जैसी विश्वव्यापी समस्याओं पर काबू पाया जा सके| तिलहन उत्पादन करने वाले मुख्य राज्यों जैसे- मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र [Read More] …
तिलहनी फसलों में खरपतवार नियंत्रण कैसे करें; अधिक उत्पादन हेतु
तिलहनी फसलों (Oilseed crops) में खरपतवार रोकथाम आवश्यक है, क्योंकि भारत में उगाई जाने वाली फसलों में तिलहनी फसलों का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है| तिलहनी फसलें खाद्य तेल के प्रमुख स्त्रोत हैं| तिलहनी फसलों में प्रमुख रूप से मूंगफली, सोयाबीन, तिल, रामतिल एवं अरण्डी की खेती खरीफ मौसम में सरसों, तोरिया, कुसुम एवं अलसी [Read More] …
राई-सरसों में खरपतवार प्रबंधन कैसे करें; जाने अधिक उत्पादन हेतु
हमारे देश में उगाई जाने वाली तिलहनी फसलों में राई-सरसों का मूंगफली के बाद दूसरा स्थान है| अगर हम इस फसल का पोषक तत्वों चुराते खरपतवारों पर नियंत्रण पा ले तो इसकी पैदावार और भी बढ़ाई जा सकती है| इस समय कुल खाद्य तेल उत्पादन का लगभग एक तिहाई तेल राई-सरसों द्वारा प्राप्त होता है| [Read More] …
तिलहनी फसलों में गंधक का महत्व; जानिए अधिक उत्पादन हेतु
भारत ने कृषि के क्षेत्र और तिलहनी फसलों में बहुत उन्नति की है, जिसमें सिंचाई की उन्नत विधियाँ, सघन खेती तथा नत्रजन उर्वरकों के अधिक उपयोग के कारण फसलों की उपज में निरन्तर वृद्धि हुई है| रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग ने निश्चित रूप से नत्रजन के असंतुलित प्रयोग को बढ़ावा दिया है, जिसके फलस्वरूप गंधक [Read More] …





