अजोला (Azolla) एक मुक्त अस्थायी रूप से तैरने वाला फर्न (हरी पत्तियों वाला पौधा जिसमें फूल नहीं खिलते) हैं| चावल की फसल के लिए यह एक सामान्य जैविक उर्वरक है| यह पौधा बलू ग्रीन एलगी के साथ सहजीवी संबंध बनाकर उगता है और नाइटोजन स्थिरीकरण के लिए आवश्यक होता है| अजोला के पत्ते त्रिकोणाकार और [Read More] …
Agriculture
असली एवं नकली उर्वरकों की वैज्ञानिक तकनीक से पहचान कैसे करें
खेती में प्रयोग में लाए जाने वाले कृषि निवेशों में सबसे मंहगी सामग्री रासायनिक उर्वरक है| उर्वरकों के शीर्ष उपयोग की अवधि हेतु खरीफ एवं रबी के पूर्व उर्वरक विर्निमाता फैक्ट्रियों तथा विक्रेताओं द्वारा असली को मिलावटी उर्वरक बनाने एवं बाजार में उतारने की कोशिश होती है| इसका सीधा प्रभाव किसानों पर पड़ता है| नकली [Read More] …
नकली एवं असली उर्वरक की पहचान सामान्य तकनीक से कैसे करें
आजादी से पहले रासायनिक उर्वरको का प्रयोग नही किया जाता था या बहुत ही कम मात्रा में किया जाता था| अत: नकली एवं असली की समस्या नही थी| क्योंकि रसायनिक उर्वरकों के स्थान पर कार्बनिक और हरी खादों पर निर्भरता ज्यादा थी| आज हालात ठीक विपरीत है, अब रसायनिक खादों पर निर्भरता ज्यादा है और [Read More] …
खस की खेती: किस्में, बुवाई, सिंचाई, पोषक तत्व, देखभाल, पैदावार
वेटिवर या खस का उद्भव स्थान भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका एवं मलेशिया माना जाता है| खस कड़ी प्रवृत्ति का घास है, जो सूखे की स्थिति एवं जल-जमाव दोनों को बर्दास्त कर लेता है| प्राचीन काल से इसके जड़ों का उपयोग तेल निकालने, चटाइयाँ बनाने एवं औषधीय उपयोग होता रहा है| दक्षिण भारतीय राज्यों में खस [Read More] …
पिप्पली की उन्नत खेती: किस्में, रोपाई, सिंचाई, देखभाल और पैदावार
पिप्पली (Pippali) को हमारे देश में अलग-अलग भाषाओँ में विभिन्न नामों से जाना जाता है, जैसे हिंदी में पीपल| यह एक गन्धयुक्त लता होती है, जो भुमि पर फैलती अथवा दूसरे वृक्षों के सहारे उपर उठती है| इसके रेंगने वाले काण्डों से उपमूल निकलते है| जिनसे इसका आरोहरण तथा प्रसारण होता है| इसकी पत्तियां पान [Read More] …
पत्थरचूर की उन्नत खेती: किस्में, रोपाई, सिंचाई, देखभाल और पैदावार
पत्थरचूर जिसे पाषाणभेद अथवा कोलियस फोर्सकोली भी कहा जाता है, उस औषधीय पौधों में से है, वैज्ञानिक आधारों पर जिनकी औषधीय उपयोगिता हाल ही में स्थापित हुई है| वर्तमान में भारतवर्ष के विभिन्न भागों जैसे तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक तथा राजस्थान में इसकी विधिवत खेती भी प्रारंभ हो चुकी है, जो काफी सफल रही है| [Read More] …





