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बी टी कपास के कीट एवं रोग और उनका नियंत्रण कैसे करें

जनवरी 27, 2025 by Bhupender Choudhary Leave a Comment

कपास हमारे देश की एक प्रमुख नकदी फसल है| औद्योगिक एवं निर्यात की दृष्टि से कपास हमारे देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है| बी टी कपास (Bt Cotton) के उगाने से भारत कपास की उत्पादकता में सुदृढ़ हुआ है| लेकिन उत्पादन क्षमता में आज भी हम अन्तराष्ट्रीय स्तर पर काफी पिछड़े है|

कपास की फसल की कम पैदावार के लिए जैविक और भौतिक कारण जिम्मेदार हैं| जैविक कारणों में कीट, पतंगे कपास की कम पैदावार के मुख्य कारण हैं| जबकि बी टी कपास में रस चूसने वाले और पत्तियों को खाने वाले कीट तथा रोग प्रमुख हैं| बी टी कपास से अच्छे उत्पादन के लिए इन सब कीट और रोग की रोकथाम आवश्यक है, जिसका उल्लेख इस लेख में किया गया है|

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बी टी कपास में रोग नियंत्रण

उखटा एवं जड़ गलन

बी.टी कपास में उखटा एवं जड़ गलन नियंत्रण के उपाय इस प्रकार है, जैसे-

1. गर्मी में खेत की गहरी जुताई करें|

2. उचित फसल चक्र अपनावे|

3. जिंक सल्फेट 25 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर की दर से उपयोग करें|

4. ट्राइकोडर्मा 8 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज या कार्बेण्डाजिम 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से बीजोपचार करें|

5. खड़ी फसल में रोग की रोकथाम हेतु डाईथेन एम-45, 3 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से ट्रेंचिग करें|

6. जिस क्षेत्र में जड़ गलन का प्रकोप अधिक हो वहाँ 10 किलोग्राम ट्राइकोडर्मा प्रति हैक्टेयर की दर से 200 किलोग्राम गोबर खाद के साथ मिलाकर खेत में डाले|

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ब्लैक आर्म / जीवाणु अंगमारी

बी.टी कपास में ब्लैक आर्म / जीवाणु अंगमारी नियंत्रण के उपाय इस प्रकार है, जैसे-

1. खड़ी फसल में 10 लीटर पानी में 1 ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लीन तथा 25 ग्राम कॉपर आक्सीक्लोराइड का घोल बनाकर छिड़काव करें|

2. आवश्यकतानुसार दूसरा छिड़काव 10 दिन बाद दोहराये|

अल्टरनेरिया पत्ती धब्बा रोग

बी टी कपास में अल्टरनेरिया पत्ती धब्बा रोग नियंत्रण के उपाय इस प्रकार है, जैसे-

1. खड़ी फसल में रोग लक्षण दिखाई देते ही 2 ग्राम मैन्कोजेब या प्रोपीनेब प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें|

2. दूसरा छिड़काव एक सप्ताह बाद दोहरायें|

यह भी पढ़ें- बीटी कॉटन (कपास) की उन्नत किस्में, जानिए विशेषताएं एवं पैदावार

पेराविल्ट या नया सूखा

कपास में यह एक कार्यिकी विक्षोभ है| अधिक एवं निरन्तर वर्षा के पश्चात तेज धूप निकलने की स्थिति में बी.टी कपास की खड़ी फसल में कुछ पौधे सूख जाते है| बी टी कपास में पेराविल्ट या नया सूखा नियंत्रण के उपाय इस प्रकार है, जैसे-

1. कोबाल्ट क्लोराईड (10 पी.पी.एम.) का ग्रसित पौधो पर छिड़काव करें|

2. 10 पी.पी.एम. का घोल बनाने हेतू 2 ग्राम कोबाल्ट क्लोराईड एक लीटर पानी मे घोल कर उसमें से 75 मि.ली. घोल को 15 लीटर पानी की टंकी में घोल कर छिड़काव करें|

क्रेजी टॉप

2,4.D, एट्राजिन अथवा अन्य खरपतवार नाशी आमतौर पर खेतों में उपयोग में लाए जाते हैं, जिसके प्रति कपास की फसल अति संवेदनशील हैं| इन खरपतवारनाशिओं की अति सुक्ष्म मात्रा भी कपास की फसल पर विपरित परिणाम डाल सकती हैं| यह अक्सर देखा गया हैं, कि बगल के खेत में डाली जाने वाली एट्राजिन या 2,4.D या अन्य खरपतवार नाशी हवा द्वारा पास के खेत में बोई गई बी टी कपास के पौधों पर गिर जाती हैं|

जिससे ग्रसित पत्तीयां सिकड़कर एक पंजे का रूप धारण करती है जिसकी पतली उंगलियां भी दिखती है| पत्तियां विकृत रूप धारण कर लेती है| इसके अलावा खरपतवारनाशी छिड़कने हेतु उपयोग में लाए गए उपकरण अगर व्यवस्थित रूप से साफ न कर उसे कपास की फसल में उपयोग में लाया जाए तो क्रेजी टॉप नामक विकृति निर्माण होती हैं| बी.टी कपास में क्रेजी टॉप नियंत्रण के उपाय इस प्रकार है, जैसे-

फसल की सिचाई कर जड़ो में युरिया उर देवें तथा 1 प्रतिशत युरिया के धोल का छिड़काव करें अथवा केल्शियम कार्बोनेट (1.5%) अथवा जिबरेलिक एसीड 0.1 मिली प्रति 10 लीटर पानी (50 PPM) का घोल बनाकर छिड़कें|

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बी टी कपास में कीट नियंत्रण

दीमक

बीटी कपास में दीमक नियंत्रण के उपाय इस प्रकार है, जैसे-

मिथाईल पैराथियान 2 प्रतिशत 25 किलो प्रति हैक्टेयर की दर से मृदा उपचार करें|

रस चुसक कीट

जैसिड्स- आर्थिक नुकसान स्तर (2-3 निम्फ प्रति पत्ती) सफेद मक्खी / थ्रिप्स- आर्थिक नुकसान स्तर (6-8 वयस्क प्रति पत्ती)|

बीटी कपास में इनके नियंत्रण के उपाय इस प्रकार है, जैसे-

जैव नियन्त्रण

क्राइसोपा परजीवी के अण्डे 50,000 प्रति हैक्टेयर की दर से पत्ती के नीचे उपयोग करें, अगर आवश्यकता हो तो फूल आने पर इसे दोहरायें|

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रासायनिक नियन्त्रण

1. 0.2 मिली इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस.एल. प्रति लीटर पानी या

2. 0.5 मिली थायोमिथोक्साम 25 डब्ल्यू.जी. प्रति लीटर पानी या

3. 400 से 600 मिली प्रति हैक्टर डायमिथोएट 30 ई.सी या

4. 1 लीटर प्रति हेक्टेयर मोनोक्रोटोफास 36 एस. एल. या

5. 1.25 लीटर प्रति हैक्टर ब्यूप्रोफेजिन 25 एस.सी या

6. 100 मिली प्रति हैक्टर एसिटामिप्रिड 20: एस.पी या

7. 625 ग्राम प्रति हैक्टर डायफेनथूरॉन 50: डब्ल्यू.पी. या

8. 650-700 ग्राम प्रति हैक्टर एसीफेट 75 एस.पी. किसी एक कीटनाशक का छिड़काव करें या

9. 200 ग्राम फ्लोनिकामिड 50 डब्ल्यू.जी. एवं 2 लीटर फिप्रोनिल 5 एस.सी. प्रति हैक्टर की दर से भी प्रभावी पाये गये|

यह भी पढ़ें- कपास फसल की विभिन्न अवस्थाओं के अनुसार प्रमुख कीट व रोग प्रकोप

मिलीबग

बीटी कपास में मिलीबग नियंत्रण के उपाय इस प्रकार है, जैसे-

1. 1 लीटर प्रति हैक्टर क्लोरोपाइरिफॉस 20 ई.सी.या

2. 1.25 लीटर प्रति हैक्टर प्रोफेनोफॉस 50 ई.सी. या

3. 1 लीटर प्रति हैक्टर डाईमिथोएट 30 ई.सी. या

4. 1 लीटर या हैक्टर क्यूनॉलफॉस 25 ई.सी. किसी एक कीटनाशक का छिड़काव करें, छिड़काव के समय एक चम्मच वॉशिंग पाउडर साथ में घोले|

तम्बाकू की लट (स्पोडोपटेरा)

बी टी कपास (बीजी-1) की संकर किस्मे तम्बाकू की लट के नियन्त्रण हेतु प्रभावी नही होती| यह लट सर्वभक्षी कीट है। कीट की लार्वा अवस्था अगस्त से अक्टूबर तक नुकसान पहुंचाती है| छोटी अवस्था में लार्वा काले सलेटी भूरे रगं की बालों रहित होती है| बड़ी होने पर गहरे हरे रंग की हो जाती है व शरीर पर काले तिकोने आकार के धब्बे बन जाते है| कीट की तितली पत्तियों की निचली सतह पर समूह मे अण्ड़े देती है व अण्ड़ो का समूह बालों से ढका रहता है| बी.टी कपास में तम्बाकू की लट नियंत्रण के उपाय इस प्रकार है, जैसे-

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शस्य व यांत्रिक नियंत्रण

1. बी.टी. बी.जी.- II कपास की सिफारिश की गई गई किस्मों को ही उगाये|

2. बी टी कपास के खेत के पास अरण्डी मूगं, ढेचा व भिण्डी ना लगाए क्योकि ये तम्बाकू की लट के सर्वाधिक पसंद के पोषक पौधे है|

3. खेत को खरपतवारों से साफ रखे / पत्थरचटा (साटा इटसिट) व कांग्रेस ग्रास न पनपने दे|

4. स्पोडोपटेरा कीट के अण्डो के समूह से जो कि पत्तियो के नीचे वाली सतह पर होते है उन्हे इकट्ठा करके नष्ट कर दे|

5. प्रकाश पाश का प्रयोग करे|

यह भी पढ़ें- कपास में एकीकृत कीट प्रबंधन कैसे करें

रासायनिक नियंत्रण 

1. थायोडिकार्ब 75 एस.पी.175 ग्राम प्रति लीटर पानी या

2. क्लोरपाइरिफॉस 20 ई.सी. 5 मि.ली. प्रति लीटर पानी या

3. क्यूनालफॉस 20 ई.सी. 2 मि.ली. प्रति लीटर पानी या

4. एसीफेट 75 एस.पी. 2 ग्राम प्रति लीटर पानी या

5. न्यूवोलूरोन 10 ई.सी. 1 मि.ली. प्रति लीटर पानी या

6. इमामैक्टन बैनजोएट 5 एस.जी 0.5 ग्राम प्रति लीटर पानी या

7. फलूबैन्डीयामाइड 480 एस सी 0.4 मि.ली. प्रति लीटर पानी या

8. इन्डोक्साकार्ब 15.8 एस.ई. 350 मि.ली. प्रति हेक्टेयर या

9. क्लोरएन्थ्रानिलप्रोल 18.5 एस.ई. 150 मि.ली. प्रति हेक्टेयर किसी भी एक कीटनाशी का छिडकाव करें|

यह भी पढ़ें- दीमक से विभिन्न फसलों को कैसे बचाएं

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