भारत में सिंचित व असिंचित क्षेत्रों में धान की खेती दोनों परिस्थितियों में की जाती है| धान की विभिन्न उन्नतशील प्रजातियाँ जो कि अधिक उपज देती हैं| उनका प्रचलन असिंचित क्षेत्रों में भी धीरे-धीरे बढ़ रहा है| परन्तु मुख्य समस्या कीट ब्याधियों की है, यदि समय रहते इनकी रोकथाम कर ली जाये तो अधिकतम उत्पादन [Read More] …
धान में खरपतवार प्रबंधन | धान में खरपतवार नियंत्रण कैसे करें?
धान में खरपतवार एवं निराई प्रबंधन, धान की खेती वर्षा ऋतु में की जाती है| इस समय वायुमण्डल में पर्याप्त नमी और तापमान की उपस्थिति से खरपतवारों का जमाव एवं विकास अधिक होता है| इसलिए धान के खेत में विभिन्न प्रकार के जलीय और वार्षिक चौड़ी पत्ती वाले तथा सकरी पत्ती वाले खरपतवार उगते हैं, [Read More] …
उर्वरकों एवं पोषक तत्वों का कृषि में महत्व: कार्य, लक्षण, प्रबंधन
वर्तमान फसल उत्पादन प्रणाली में मिटटी की विभिन्नता, उर्वरकों और उत्पादकता का ध्यान न रखते हुए उर्वरकों की सामान्य संस्तुतियों को सीधे तौर पर अपनाना एवं उनकी अपर्याप्त तथा असंतुलित मात्रा का प्रयोग सामान्यतः देखने में आता है| यदि उत्पादकता और उर्वरकों के उपयोग दक्षता में भविष्य में वृद्धि करना है, तो निश्चित तौर पर [Read More] …
धान में समेकित खरपतवार प्रबंधन | धान में खरपतवार नियंत्रण कैसे करें
धान में समेकित खरपतवार नियंत्रण, हमारे देश की जनसंख्या वृद्धि के साथ खाद्यानों की मांग को पूरा करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है| धान हमारे देश की प्रमुख खाद्यान फसल है| इसकी खेती विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों में लगभग 4 करोड़ 22 लाख क्षेत्र में की जाती है| आजकल धान का उत्पादन लगभग 9 करोड़ [Read More] …
धान में सूत्रकृमि क्या है?; धान में सूत्रकृमि को कैसे नियंत्रित करते हैं?
धान की फसल को नुकसान पहुँचाने वाले कीट और व्याधियों में सूत्रकृमियों का महत्वपूर्ण स्थान है| धान में सूत्रकृमि की कई प्रजातियाँ धान की फसल को हानि पहुंचाकर, पैदावार को प्रभावित करती हैं, धान में सूत्रकृमियों द्वारा क्षति, इनकी जनसंख्या के घनत्व पर निर्भर करती है| जो 2 से 40 प्रतिशत तक हो सकती है, [Read More] …
सीधी बुवाई द्वारा धान की खेती: किस्में, बुवाई, देखभाल और पैदावार
धान की सीधी बुवाई द्वारा खेती, खाद्य फसलों में गेहूं के बाद चावल एक महत्वपूर्ण फसल है, जोकि विश्व की आधे से अधिक आबादी के लिए मुख्य भोजन है| एशिया में चावल आम तौर पर रोपित पौधों द्वारा पलेवा की चड़युक्त मिट्टी में उगाया जाता है| जिसके लिए पानी की अधिक मात्रा और मजदूर की आवश्यकता [Read More] …





