धान की सीधी बुवाई द्वारा खेती, खाद्य फसलों में गेहूं के बाद चावल एक महत्वपूर्ण फसल है, जोकि विश्व की आधे से अधिक आबादी के लिए मुख्य भोजन है| एशिया में चावल आम तौर पर रोपित पौधों द्वारा पलेवा की चड़युक्त मिट्टी में उगाया जाता है| जिसके लिए पानी की अधिक मात्रा और मजदूर की आवश्यकता [Read More] …
बासमती धान में समेकित नाशीजीव प्रबंधन कैसे करें; जाने उपाय
बासमती धान की फसल जो कि मुख्य रूप से हरियाण, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब एवं उत्तरांखण्ड राज्यों में उगाई जाती है| बासमती धान अनेक कीड़ों और रोगों के प्रकोप से प्रभावित होती है| किसान इनके नियंत्रण के लिए रासायनिक कीटनाशकों और फफूदीनाशकों का अविवेकपूर्ण प्रयोग करते हैं| जिससे न केवल पर्यावरण प्रदूषित होता है, बल्कि [Read More] …
धान की जैविक खेती: किस्में, रोपाई, सिंचाई, देखभाल और उत्पादन
भारत धान की जैविक और परम्परागत पद्धति की खेती में विश्व में विशेष स्थान रखता है| धान की खेती यहां की सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में अपनी गहरी छाप रखती है| आधुनिक कृषि पद्धति में सघन खेती, रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों एवं नींदानाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से भारत लगभग फसलोत्पादन में आत्मनिर्भर तो हो गया [Read More] …
आलू में एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन कैसे करें; जाने अच्छी उपज हेतु
आलू की फसल हमारे देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान रखती है, क्योंकि यहां की जलवायु आलू उत्पादन के लिए बहुत अनुकूल है| आलू में लगभग भारत के हर क्षेत्र का उत्पादन में योगदान है| आलू का प्रयोग अधिकतर पोष्टिक व्यंजन, सब्जी एवं आलू के चिप्स बनाने में किया जाता है| हमारे किसानों को इसके [Read More] …
दलहनी फसलों में एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन कैसे करें; जाने उपाय
दलहनी फसलें हमारे देश की खाद्य सामग्री में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं| दलहनी फसलों का हमारी कृषि पद्धति में प्रमुख स्थान है, क्योंकि इनकी खेती में लागत थोड़ी आती है और यह भूमि को उपजाउ करने की क्षमता रखती है तथा उन क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है, जहां पर नमी की कमी होती है| दलहनें [Read More] …
तिलहनी फसलों में एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन कैसे करें; जाने उपाय
तिलहनी फसलें उन फसलों को कहते हैं, जिनसे वनस्पति तेल का उत्पादन होता है| तिलहनी फसलों में प्रमुख हैं, जैसे- तिल, सरसों, मूँगफली, सोयाबीन तथा सूरजमुखी| हमारे देश में तिलहनी फसलों की खेती अनुपजाऊ भूमि और पानी की कमी वाले क्षेत्रों में की जाती है| क्षेत्रफल की दृष्टि से खाद्यान्न फसलों के बाद भारत में [Read More] …





