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Quotes

जवाहरलाल नेहरू के अनमोल विचार | Pandit Nehru Quotes

August 7, 2023 by Bhupender Choudhary Leave a Comment

भारत के पहले प्रधान मंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्य तिथि हर साल 27 मई को मनाई जाती है| जवाहरलाल नेहरू ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में बहुत बड़ा योगदान दिया| वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) के प्रमुख नेताओं में से एक थे, जिन्होंने भारत में ब्रिटिश शासन के खिलाफ अभियान चलाया और लड़ाई लड़ी|

नेहरू ने प्रधान मंत्री का पद संभालते हुए भारत का पहला आम चुनाव लड़ा और जीता| परिणामस्वरूप, उन्होंने प्रधान मंत्री के रूप में दूसरे और तीसरे कार्यकाल में भी जीत हासिल की और 27 मई 1964 को अपनी मृत्यु तक इस पद पर कार्यरत रहे| इस लेख में उनके कुछ प्रेरणादायक विचारों का उल्लेख किया गया है|

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जवाहरलाल नेहरू के प्रसिद्ध उद्धरण

1. “हम एक अद्भुत दुनिया में रहते हैं जो सुंदरता, आकर्षण और रोमांच से भरी है| हमारे साहसिक कारनामों का कोई अंत नहीं है, बशर्ते हम उन्हें खुली आँखों से खोजें|”

2. “अत्यधिक सतर्क रहने की नीति सबसे बड़ा जोखिम है|”

3. “बुराई अनियंत्रित रूप से बढ़ती है, सहन की गई बुराई पूरी व्यवस्था में जहर घोल देती है|”

4. “संस्कृति मन और आत्मा का विस्तार है|”

5. “पूंजीवादी समाज में ताकतों को, अगर अनियंत्रित छोड़ दिया जाए, तो अमीर को और अमीर तथा गरीबों को और गरीब बना देती हैं|”      -जवाहरलाल नेहरू

6. “राजनीति और धर्म अप्रचलित हैं| विज्ञान और अध्यात्म का समय आ गया है|”

7. “किसी महान उद्देश्य में निष्ठावान और कुशल कार्य, भले ही इसे तुरंत मान्यता न मिले, अंततः फल देता है|”

8. “समय को वर्षों के बीतने से नहीं मापा जाता है, बल्कि इस बात से मापा जाता है कि कोई क्या करता है, क्या महसूस करता है और क्या हासिल करता है|”

9. “एक क्षण आता है, जो इतिहास में बहुत कम आता है, जब हम पुराने से नए की ओर कदम बढ़ाते हैं, जब एक युग समाप्त होता है, और जब लंबे समय से दबी हुई एक राष्ट्र की आत्मा को अभिव्यक्ति मिलती है|”

10. “तथ्य तो तथ्य हैं और आपकी पसंद के कारण गायब नहीं होंगे|”    -जवाहरलाल नेहरू

11. “कार्य में मूर्खता से अधिक भयानक कुछ भी नहीं है|”

12. “सही शिक्षा के माध्यम से ही समाज की बेहतर व्यवस्था का निर्माण किया जा सकता है|”

13. “एक विश्वविद्यालय मानवतावाद, सहिष्णुता, तर्क, विचारों के साहसिक कार्य और सत्य की खोज के लिए खड़ा होता है|”

14. “शिक्षा का उद्देश्य समग्र रूप से समुदाय की सेवा करने की इच्छा पैदा करना और प्राप्त ज्ञान को न केवल व्यक्तिगत बल्कि सार्वजनिक कल्याण के लिए लागू करना था|”

15. “समाजवाद… न केवल जीवन जीने का एक तरीका है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक समस्याओं के प्रति एक निश्चित वैज्ञानिक दृष्टिकोण है|”      -जवाहरलाल नेहरू

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16. “आइए हम थोड़ा विनम्र बनें; आइए सोचें कि सच्चाई शायद पूरी तरह हमारे साथ नहीं है|”

17. “प्रत्येक आक्रामक राष्ट्र की यह दावा करने की आदत है, कि वह रक्षात्मक कार्य कर रहा है|”

18. “बच्चे बगीचे में कलियों की तरह होते हैं और उनका ध्यानपूर्वक और प्यार से पालन-पोषण किया जाना चाहिए, क्योंकि वे देश का भविष्य और कल के नागरिक हैं|”

19. “आज के बच्चे कल का भारत बनाएंगे| हम उनका पालन-पोषण जिस तरह करेंगे, वही देश का भविष्य तय करेगा|”

20. “भारत और अन्य जगहों पर जिसे धर्म कहा जाता है, या किसी भी दर पर संगठित धर्म, उसके तमाशे ने मुझे भय से भर दिया है और मैंने अक्सर इसकी निंदा की है और इसे साफ़ करने की कामना की है| लगभग हमेशा यह अंध विश्वास और प्रतिक्रिया, हठधर्मिता और कट्टरता, अंधविश्वास, शोषण और निहित स्वार्थों के संरक्षण के लिए खड़ा दिखता है|”    -जवाहरलाल नेहरू

21. “बहुत साल पहले, हमने नियति के साथ वादाखिलाफी की थी, और अब समय आ गया है जब हम अपनी प्रतिज्ञा को पूरा करेंगे, पूरी तरह से नहीं, बल्कि काफी हद तक| आधी रात के समय, जब दुनिया सो रही होगी, भारत जीवन और स्वतंत्रता के लिए जागेगा| एक क्षण आता है, जो इतिहास में शायद ही कभी आता है, जब हम पुराने से नए की ओर कदम बढ़ाते हैं, जब एक युग समाप्त होता है, और जब लंबे समय से दबी हुई एक राष्ट्र की आत्मा को अभिव्यक्ति मिलती है|”

22. “मानवता के सर्वोत्तम और श्रेष्ठतम उपहारों पर किसी विशेष जाति या देश का एकाधिकार नहीं हो सकता; इसका दायरा सीमित नहीं हो सकता है और न ही इसे कंजूस का जमीन के नीचे दबा हुआ धन माना जा सकता है|”

23. “यदि कोई व्यक्ति धर्म के आधार पर दूसरे को मारने के लिए हाथ उठाता है, तो मैं सरकार के प्रमुख के रूप में और बाहर से, अपने जीवन की अंतिम सांस तक उससे लड़ूंगा|”

24. “कल के आदर्श और उद्देश्य अभी भी आज के आदर्श थे, लेकिन उन्होंने अपनी कुछ चमक खो दी और यहां तक कि, जैसे ही कोई उनकी ओर जाने लगा, उन्होंने वह चमकती सुंदरता खो दी जिसने दिल को गर्म कर दिया था और शरीर को जीवंत बना दिया था| बुराई की कई बार जीत हुई, लेकिन इससे भी बुरी बात यह थी कि जो सही लग रहा था, उसका मोटा होना और विकृत होना| क्या मानव स्वभाव अनिवार्य रूप से इतना बुरा था कि उसे उचित व्यवहार करने और मनुष्य को वासना, हिंसा और धोखे के प्राणी से ऊपर उठाने से पहले, पीड़ा और दुर्भाग्य के माध्यम से, सदियों के प्रशिक्षण की आवश्यकता होगी? और, इस बीच, क्या वर्तमान या निकट भविष्य में आमूल-चूल परिवर्तन का हर प्रयास विफलता की ओर अग्रसर था|”

25. “फिर भी अतीत हमेशा हमारे साथ है और हम जो कुछ भी हैं और जो कुछ भी हमारे पास है वह सब अतीत से ही आता है| हम इसके उत्पाद हैं और हम इसमें डूबे हुए रहते हैं| इसे न समझना और इसे हमारे भीतर रहने वाली किसी चीज़ के रूप में महसूस करना वर्तमान को समझना नहीं है| इसे वर्तमान के साथ जोड़ना और इसे भविष्य तक विस्तारित करना, इसे वहां से तोड़ना जहां यह इतना एकजुट नहीं हो सकता है, इन सभी को विचार और कार्य के लिए स्पंदित और स्पंदित करने वाली सामग्री बनाना – यही जीवन है|”      -जवाहरलाल नेहरू

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सरदार वल्लभभाई पटेल के अनमोल विचार

August 5, 2023 by Bhupender Choudhary Leave a Comment

Sardar Patel Quotes: स्वतंत्र भारत के पहले उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के तौर पर मनाया जाता है| हर साल 31 अक्तूबर के दिन राष्ट्रीय एकता दिवस मनाते हैं और सरदार पटेल को याद करते हैं अर्थात 15 दिसंबर को भारत के स्वतंत्रता संग्राम के स्तंभों में से एक और स्वतंत्र भारत के पहले उप प्रधान मंत्री और गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की पुण्य तिथि होती है| उन्हें उनके निर्णायक नेतृत्व के लिए याद किया जाता है, जिसके कारण उन्हें “भारत का लौह पुरुष” कहा जाने लगा| स्वतंत्रता के बाद छोटी-बड़ी रियासतों को जोड़कर भारत के अधीन लाने का पूरा श्रेय सरदार पटेल को जाता है|

जब देश आजाद हुआ तो छोटे छोटे 562 देसी रियासतों में बंटा था| सभी रियासतों का विलय करना आसान नहीं था| सरदार वल्लभ भाई पटेल ने इस चुनौती का सामना किया और अपनी बुद्धि और अनुभव का इस्तेमाल करते हुए सभी को एकता के सूत्र में पिरोया| उनके इसी योगदान के कारण सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती को एकता दिवस के तौर पर मनाते हैं| सरदार वल्लभ भाई पटेल के उद्धरण लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं| आइए जानते हैं सरदार पटेल के अनमोल विचार, जो एकता का पढ़ाते हैं पाठ|

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सरदार वल्लभ भाई पटेल के उद्धरण

सरदार वल्लभ भाई पटेल को याद करने के लिए, हम उनके कुछ सबसे प्रेरणादायक विचारों पर गौर करते हैं| जो इस प्रकार है, जैसे-

1. “शक्ति के अभाव में विश्वास किसी काम का नहीं है| किसी भी महान कार्य को पूरा करने के लिए विश्वास और शक्ति दोनों ही आवश्यक हैं|”

2. “एकता के बिना जनशक्ति एक ताकत नहीं है| जब तक कि इसे ठीक से सामंजस्यपूर्ण और एकजुट न किया जाए, तब यह एक आध्यात्मिक शक्ति बन जाती है|”

3. “भले ही हम हजारों की संपत्ति खो दें, और हमारा जीवन बलिदान हो जाए| हमें मुस्कुराते रहना चाहिए और ईश्वर और सत्य पर विश्वास रखते हुए प्रसन्न रहना चाहिए|”

4. “यह महसूस करना प्रत्येक नागरिक की प्रमुख जिम्मेदारी है, कि उसका देश स्वतंत्र है और इसकी स्वतंत्रता की रक्षा करना उसका कर्तव्य है|”

5. “सत्याग्रह कमजोर या कायरों का धर्म नहीं है|”

6. ”हमें आपसी कलह को दूर करना होगा, ऊंच-नीच का भेद मिटाकर समानता की भावना विकसित करनी होगी और छुआछूत को दूर करना होगा| हमें ब्रिटिश शासन से पहले प्रचलित स्वराज की स्थितियों को बहाल करना होगा| हमें एक ही पिता की संतान की तरह रहना है|”

7. “लोकतांत्रिक व्यवस्था में हमें प्रेस की स्वतंत्रता, बोलने की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संघ की स्वतंत्रता और सभी प्रकार की स्वतंत्रता होनी चाहिए|”

8. “सामान्य प्रयास से हम देश को एक नई महानता तक ले जा सकते हैं| जबकि एकता की कमी हमें नई विपत्तियों का सामना कराएगी|”

9. “हमारा युद्ध अहिंसक है, धर्म युद्ध है|”

10. “अहिंसा को विचार, शब्द और कर्म में अपनाना होगा| हमारी अहिंसा का माप ही हमारी सफलता का माप होगा|”

11. “आज हमें ऊंच-नीच, अमीर-गरीब, जाति-पंथ का भेद मिटाना होगा|”

12. “घरेलू सरकार में एकता और सहयोग आवश्यक शर्तें हैं|”

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13. “जाति और पंथ का कोई भी भेद हमारे लिए बाधा नहीं बनना चाहिए| सभी भारत के बेटे-बेटियाँ हैं, हम सभी को अपने देश से प्यार करना चाहिए और आपसी प्यार और मदद पर अपना भाग्य बनाना चाहिए|”

14. “सुख और दुख कागज के गोले हैं, मौत से मत डरो| राष्ट्रवादी ताकतों से जुड़ें, एकजुट रहें| जो भूखे हैं उन्हें काम दो, अशक्तों को भोजन दो, अपने झगड़े भूल जाओ|”

15. “सत्याग्रह पर आधारित युद्ध सदैव दो प्रकार का होता है| एक वह युद्ध है जो हम अन्याय के खिलाफ लड़ते हैं और दूसरा हम अपनी कमजोरियों के खिलाफ लड़ते हैं|”

16. “विचार, वचन और कर्म में अहिंसा का पालन करना होगा| हमारी अहिंसा का माप ही हमारी सफलता का माप होगा|”

17. “कोई भी क्रांति का रास्ता अपना सकता है, लेकिन क्रांति से समाज को झटका नहीं लगना चाहिए| क्रांति में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है|”

18. “महात्माजी द्वारा शुरू किया गया युद्ध दो चीजों के खिलाफ है – सरकार और दूसरा खुद के खिलाफ| पहले प्रकार का युद्ध ख़त्म हो चुका है, लेकिन बाद वाला कभी ख़त्म नहीं होगा, क्योंकि यह आत्मशुद्धि के लिए है|”

19. “मैं मुंहफट और असंस्कारी हूं, मेरे लिए इस प्रश्न का केवल एक ही उत्तर है| इसका उत्तर यह नहीं है कि आपको खुद को कॉलेजों में बंद कर लेना चाहिए और इतिहास और गणित सीखना चाहिए| जबकि देश में आग लगी हुई है और हर कोई आजादी की लड़ाई लड़ रहा है| आपका स्थान आपके उन देशवासियों के साथ है, जो आज़ादी की लड़ाई लड़ रहे हैं|”

20. “जब तक आप नहीं जानते कि कैसे मरना है, तब तक आपके लिए मारना सीखना बेकार है| क्रूर बल से भारत को कोई लाभ नहीं होगा, यदि भारत का कल्याण होना है तो अहिंसा से होगा|”

21. “चरित्र निर्माण के दो तरीके – उत्पीड़न को चुनौती देने की ताकत पैदा करना, और परिणामी कठिनाइयों को सहन करना जो साहस और जागरूकता को जन्म देता है|”

22. “आज भारत के सामने मुख्य कार्य खुद को एक सुगठित और एकजुट शक्ति के रूप में मजबूत करना है|”

23. “जाति, सम्प्रदाय तेजी से लुप्त हो जायेंगे| हमें इन सभी बातों को शीघ्रता से भूलना होगा| ऐसी सीमाएँ हमारे विकास में बाधा डालती हैं|”

24. “धर्म मनुष्य और उसके निर्माता के बीच का मामला है|”

25. “हमने अपनी कमजोरियों को ईमानदारी से और निश्चित तरीके से दूर करने का प्रयास किया है| अगर किसी सबूत की जरूरत है तो वह है हिंदू-मुस्लिम एकता| इसी तरह, हमने पारसियों, ईसाइयों और देश के अन्य नागरिकों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध स्थापित किए हैं|”

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चन्द्रशेखर आजाद के अनमोल विचार | Chandrashekhar Azad Quotes

September 5, 2022 by Bhupender Choudhary Leave a Comment

आजाद उन स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ब्रिटिश प्रशासन को बुरे सपने दिए| चन्द्रशेखर आजाद भारत के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे| वह भारतीय स्वतंत्रता के अग्रदूत हैं| उनके साहस और देशभक्ति की कहानियों ने हमेशा उनकी पीढ़ी के अन्य लोगों और आज की पीढ़ियों को भी प्रेरित किया है|

चन्द्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को भाबरा इंडिया में हुआ था| उनके पिता पंडित सीताराम तिवारी और माता जागरानी देवी थीं| चन्द्रशेखर आजाद ने संस्कृत पाठशाला, वाराणसी से अपनी पढ़ाई पूरी की है| चन्द्रशेखर आजाद का वास्तविक नाम चंद्रशेखर तिवारी था|

वह क्रांतिकारी भारत का चेहरा था और उत्तरोत्तर कई घटनाओं में शामिल था जिसमें काकोरी ट्रेन डकैती, लाहौर में सांडर्स की शूटिंग, विधानसभा बम की घटना और लाला लाजपत राय की हत्या का बदला लेने के लिए भी शामिल था| चन्द्रशेखर आजाद महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन जैसे आंदोलनों में शामिल थे|

वह उदारवाद, समाजवाद और अराजकतावाद जैसी राजनीतिक विचारधारा में विश्वास करते थे| वर्तमान में, उनके नाम पर कई सार्वजनिक संस्थान और स्थान हैं| वह सर्वोच्च कोटि के नायक थे जिन्होंने राष्ट्र के कल्याण के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी| यहाँ आज़ाद के कुछ प्रेरणादायक उद्धरण हैं जो आपको प्रेरित करेंगे|

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चन्द्रशेखर आजाद के अनमोल विचार

भारत के महान क्रांतिकारियों और स्वतन्त्रता सेनानियों में से एक चन्द्रशेखर आजाद के कहे अनेक प्रेरणादायक उद्धरण हैं, जिन्हें हर भारतीयों को जानना चाहिए| जो इस प्रकार है, जैसे-

चन्द्रशेखर आजाद के 10 अनमोल वचन

1. अगर आपका खून नहीं रोता है, तो यह पानी है जो आपकी नस में बहता है|

2. दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे| आजाद ही रहे हैं, आजाद ही रहेंगे|

3. मेरा नाम ‘आजाद’ है, मेरे पिता का नाम ‘स्वतंत्र’ है और मेरा निवास ‘जेल’ है|

4. जमीन पर एक विमान हमेशा सुरक्षित रहता है, लेकिन वह उसके लिए नहीं बना है| महान ऊंचाइयों को प्राप्त करने के लिए जीवन में हमेशा कुछ सार्थक जोखिम उठाएं|

5. ऐसी जवानी किसी काम की नहीं जो अपनी मातृभूमि के काम न आये|

6. दूसरों को अपने से बेहतर करते हुए न देखें, हर दिन अपने रिकॉर्ड को हराएं| क्योंकि सफलता आपके और आपके बीच की लड़ाई है|

7. मैं एक ऐसे धर्म में विश्वास करता हूं जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे का प्रचार करता है|

8. यदि कोई राष्ट्र के प्रति समर्पित नहीं है तो उसका जीवन व्यर्थ है|

9. सूरज पश्चिम में निकल सकता है| पर ये आजाद अपने देश को कभी अकेला, नहीं छोड़ सकता है|

10. किसी क्रांतिकारी का सबसे बड़ा हथियार नहीं होती हैं बंदूकें, बम या तोप| क्रांतिकारी विचारों से बनते हैं जो आते हैं, नैतिकता से सत्य प्रेम से और किताबों से|

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चन्द्रशेखर आजाद के 20 अनमोल वचन

11. देश अगर हाथ जोड़ने से आजाद हो जाता| तो यह जान लें भारत कभी गुलाम नहीं होता|

12. खैरात में मिली खुशी हमें अच्छी नहीं लगती| क्योंकि हम अपने गमों में भी जीते है नवाब कि तरह|

13. जीवित रहते मैं अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करता रहूँगा| किसी भी क्षण मैं मातृभूमि की खातिर अपने प्राण न्योछावर करने से पीछे नहीं हटूंगा|

14. किसी भी भारतवासी के जख्म का बदला हजारों जख्मों से लिया जाएगा| यह चेतावनी नहीं घोषणा है|

15. जो दुश्मन हमारे धन संपदा और संस्कृति को लूट रहे हैं, उन्हें लूटना और उनसे अपने धन संपदा की रक्षा करना कोई गुनाह नहीं है|

16. मातृभूमि की इस दुर्दशा को देखकर जो तुम चुप बैठे रहे| तो तुम्हारा मान-सम्मान और स्वाभिमान दुश्मनों के अधीन है|

17. गालों पर थप्पड़ खाने से स्वतंत्रता नहीं मिलती| गोलियां मारनी पड़ती है दुश्मनों को|

18. सच्चा धर्म वही है जो स्वतंत्रता को परम मूल्य की तरह स्थापित करे|

19. देश मेरा गुलाम नहीं है, लोगो की सोच गुलाम है|

20. जब तक मेरे शरीर में प्राण है, मैं अंग्रेज़ो की गुलामी नहीं करूंगा|

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चन्द्रशेखर आजाद के 25 अनमोल वचन

21. अगर इश्क करना ही है तो वतन से करो, मरना ही है तो वतन की खातिर मारो|

22. आज का युवा संगठित हो रहा है| यह मेरा देश की शक्ति का संगठन है|

23. मेरा यह छोटा सा संघर्ष ही, कल के लिए महान बन जाएगा|

24. मौत तो एक दिन सबको आनी है, कुछ लोग डर-डर के जीते है, कुछ लोग मर कर भी अमर हो जाते है|

25. शत्रु के साथ कैसी नम्रता, हमारी नम्रता का ही फल है, आज हमारी मातृभूमि संकट में है|

चंद्रशेखर आजाद ही भगत सिंह के गुरु थे| आजादी के बाद चंद्रशेखर आजाद की बहादुरी और योगदान को देखने के लिए इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क का नाम चंद्रशेखर आजाद पार्क रखा गया| वे केवल 25 वर्षों तक जीवित रहे लेकिन उनका जीवन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के लिए एक समर्पण था|

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सुभाष चंद्र बोस के अनमोल विचार | Subhash Chandra Bose Quotes

April 28, 2020 by Bhupender Choudhary Leave a Comment

भारत के महानतम स्वतंत्रता सेनानियों में से एक नेताजी सुभाष चंद्र बोस का नाम इतिहास में अमर है| सुभाष चन्द्र बोस  के पिता का नाम जानकीनाथ बोस और माँ का नाम प्रभावती था| सुभाष चंद्र बोस ने भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा पास की, कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए, फॉरवर्ड ब्लाक का गठन किया और अंग्रेज़ों के खिलाफ लड़ने के लिये, उन्होंने जापान के सहयोग से आज़ाद हिन्द फौज का गठन किया था सुभाष चन्द्र बोस के द्वारा दिया गया जय हिन्द का नारा भारत का राष्ट्रीय नारा बन गया है| इस लेख में सुभाष चंद्र बोस के उन अनमोल विचार का उल्लेख किया गया है, जो आज भी जन मानस को प्रोत्साहित करते है|

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सुभाष चंद्र बोस का संक्षिप्त परिचय 

सुभाष चंद्र बोस का संक्षिप्त परिचय इस प्रकार है, जैसे-

नामनेताजी सुभाष चंद्र बोस
जन्म23 जनवरी 1897, कटक, बंगाल प्रेसीडेंसी ब्रिटिश भारत
मृत्यु18 अगस्त 1945 (अपुष्ट)
नागरिकताभारतीय
क्षेत्रस्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिक नेता
उपलब्धिवह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे प्रमुख नेताओं में से एक थे और भारतीय राष्ट्रीय सेना का नेतृत्व किया, नेताजी को भारत को स्वतंत्रता दिलाने के लिए किये गए प्रयत्नों के लिए हमेशा याद रखा जायेगा

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सुभाष चंद्र बोस के अनमोल विचार 

सुभाष चंद्र बोस के प्रमुख अनमोल विचार निम्नलिखित प्रकार से है, जैसे-

1. तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा|

2. राष्ट्रवाद मानव जाति के उच्चतम आदर्शों सत्यम, शिवम, सुन्दरम से प्रेरित है|

3. भारत में राष्ट्रवाद ने एक ऐसी शक्ति का संचार किया है जो लोगों के अन्दर सदियों से निष्क्रिय पड़ी थी|

4. याद रखिये सबसे बड़ा अपराध अन्याय सहना और गलत के साथ समझौता करना है|

5. एक सच्चे सैनिक को सैन्य और आध्यात्मिक दोनों ही प्रशिक्षण की ज़रुरत होती है|        -सुभाष चंद्र बोस

6. इतिहास में कभी भी विचार-विमर्श से कोई ठोस परिवर्तन नहीं हासिल किया गया है|

7. मेरे मन में कोई संदेह नहीं है कि हमारे देश की प्रमुख समस्याएं गरीबी ,अशिक्षा , बीमारी, कुशल उत्पादन एवं वितरण सिर्फ समाजवादी तरीके से ही की जा सकती है|

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8. ये हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी स्वतंत्रता का मोल अपने खून से चुकाएं, हमें अपने बलिदान और परिश्रम से जो आज़ादी मिले, हमारे अन्दर उसकी रक्षा करने की ताकत होनी चाहिए|

9. आज हमारे अन्दर बस एक ही इच्छा होनी चाहिए, मरने की इच्छा ताकि भारत जी सके| एक शहीद की मौत मरने की इच्छा ताकि स्वतंत्रता का मार्ग शहीदों के खून से प्रशश्त हो सके|

10. अगर हम संघर्ष न करे तो हमें किसी भी डर का सामना नहीं करना पड़ेगा किन्तु इससे हमारे जीवन जीने का स्वाद आधा खत्म हो जायेगा|        -सुभाष चंद्र बोस

11. माँ का प्यार सबसे ज्यादा गहरा होता है क्योंकि इसमें स्वार्थ नहीं होता और इसकी तुलना कभी भी हम नहीं कर सकते|

12. आजादी मिलती नहीं बल्कि इसे छीनना पड़ता है|

13. हमारे अंदर प्रेरणा की शक्ति होनी चाहिए जो हमें वीरतापूर्ण और साहसिक कार्यो को करने के लिए प्रेरित करें|

14. एक सैनिक के रूप में आपको हमेशा तीन आदर्शों का पालन और उन पर जीना होगा:- सच्चाई, कर्तव्य और बलिदान| जो सैनिक हमेशा अपने देश के प्रति वफादार रहता है, जो हमेशा अपना जीवन बलिदान करने के लिए तैयार रहता है, वो अजेय है| अगर तुम भी अजेय बनना चाहते हो तो इन तीन आदर्शों को अपने हृदय में बसा लो|

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15. शत्रु के शत्रु से मित्रता स्थापित कर उसकी सहायता से अपने शत्रु को पछडना सर्वमान्य राजनीतिक चाल है| तदनुसार, जर्मनी, जापान, इटली आदि देश हमारे मित्र बने हैं| मैं हिंदुस्तान का सेवक हूं, सैनिक हूं, मैं जिऊंगा अपने देश के लिए और मरुंगा अपने देश के लिए|        -सुभाष चंद्र बोस

16. प्रफुल्ल गुलाब के फूलों के लिए कांटो का भी स्वागत करना होगा| उषा की शोभा यदि हमें देखनी है, तो हमें घनी अंधेरी रात धैर्यपूर्वक बितानी होगी|

17. इतिहास बताता है कि साम्राज्य निर्माण होते हैं, फैलते हैं और नष्ट होते है| अंग्रेजी साम्राज्य अब तीसरी स्थिति में है| उनके साम्राज्य की समाप्ति हमारी एकता, दृढ़ता, पराक्रम और त्याग पर निर्भर है| स्वराज्य प्राप्ति के लिए हमें क्रांतिकारी कदम उठाने होंगे|

18. यदि सब लोग अपने व्यक्तिगत स्वार्थों की पूर्ति में व्यस्त होंगे, तब देश की चिंता कौन करेगा?

19. हमारा कार्य केवल प्रासंगिक न रहे, हम उसे स्थायी रूप देंगे| हमारी शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक तीनों प्रकार की उन्नति होनी चाहिए|

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20. कर्मयोगी महापुरुषों हैं|        -सुभाष चंद्र बोस

21. मैंने अमूल्य जीवन का इतना समय व्यर्थ ही नष्ट कर दिया, यह सोच कर बहुत ही दुःख होता है| कभी कभी यह पीड़ा असह्य हो उठती है, मनुष्य जीवन पाकर भी जीवन का अर्थ समझ में नहीं आया| यदि मैं अपनी मंजिल पर नहीं पहुँच पाया, तो यह जीवन व्यर्थ है, इसकी क्या सार्थकता है?

22. मैंने जीवन में कभी भी खुशामद नहीं की है, दूसरों को अच्छी लगने वाली बातें करना मुझे नहीं आता|

23. निसंदेह बचपन और युवावस्था में, पवित्रता और संयम अति आवश्यक है|

24. परीक्षा का समय निकट देख कर हम बहुत घबराते हैं| लेकिन एक बार भी यह नहीं सोचते की जीवन का प्रत्येक पल परीक्षा का है, यह परीक्षा ईश्वर और धर्म के प्रति है| स्कूल की परीक्षा तो दो दिन की है, परन्तु जीवन की परीक्षा तो अनंत काल के लिए देनी होगी| उसका फल हमें जन्म-जन्मान्तर तक भोगना पड़ेगा|

25. अपनी ताकत में विश्वास करो उधार की ताकत आपके लिए घातक हो सकती है|        -सुभाष चंद्र बोस

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डॉ भीमराव आंबेडकर के अनमोल विचार | Bhimrao Ambedkar Quotes

April 20, 2020 by Bhupender Choudhary Leave a Comment

भारतीय संविधान के निर्माता डॉ भीमराव आंबेडकर एक ऐसे राष्ट्र पुरुष थे, जिन्होंने समूचे देश के सम्बन्ध में, भारत के इतिहास के सम्बन्ध में एवं समाज परिवर्तन पर महत्त्वपूर्ण वैचारिक योगदान दिया है| डॉ भीमराव आंबेडकर एक विद्वान, लेखक, राजनीतिज्ञ, समाज-सुधारक, कानून विशेषज्ञ, शिक्षा शास्त्री और नवसमालोचक के रूप में नई पीढ़ी के सामने उदय हुए है|

डॉ भीमराव आंबेडकरअपने पिता के अलावा गौतम बुद्ध, ज्योतिबा फुले और कबीर से प्रभावित थे, जिन्हें अम्बेड़कर के तीन गुरू भी कहा जाता है| डॉ भीमराव आंबेडकर ने पाश्चात्य स्वतन्त्रता और मानवतावादी सम्बन्धी विचारों का ज्ञान प्रो. जॉन डेवी, जॉन स्टूअर्ट मिल, एडमण्ड ब्रुके और प्रो. हारोल्ड लॉस्की इत्यादि विचारकों से लिया| जिसका प्रमाण उनकी लिखितों और भाषणों में प्रयोग उद्धरणों से लगाया जा सकता है|

अत: कहा जा सकता है कि डॉ भीमराव आंबेडकर को पश्चिम ने उनके “हथियार” और पूर्व ने “आत्म-बल” दिया, जिसके आधार पर सामाजिक समानता और सामाजिक न्याय के लिए उन्होंने संघर्ष किया|

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डॉ भीमराव आंबेडकर आधुनिक भारत के महान चिंतक दार्शनिक, अर्थशास्त्री विधिवेता, शोषितों के मुक्ति-नायक, संघर्षशील सामाजिक कार्यकर्ता और संविधान निर्माता थे| वे स्वतन्त्रता-समानताबन्धुत्व के क्रान्तिकारी आदर्शों को भारतीय समाज में स्थापित करना चाहते थे| जो भी प्रथा, परम्परा, विचारधारा, कानून या धार्मिक मान्यता इन मूल्यों आदर्शों को प्राप्त करने में बाधा रही हैं, वे उनके प्रबल आलोचक रहे|

उन्होंने जातिप्रथा-छूआछूत और पूंजीवादी-सामन्ती विचारधारा की तमाम शोषणपरक प्रणालियों की इसी आधार पर आलोचना करके बहुआयामी व वस्तुपरक विश्लेषण किया| उनका विश्वास था कि अगर वे अपने संघर्ष में कामयाब हो जाते हैं तो यह किसी विशेष समुदाय के हित में नहीं होगा| बल्कि सभी भारतीयों के लिए एक वरदान बनेगा|

ऐसे में समाज परिवर्तन के इच्छुकों के लिए इस लेख में “डॉ भीमराव आंबेडकर के प्रेरणादायी संघर्षशील जीवन व क्रान्तिकारी विचारों से दोस्ती निहायत प्रासंगिक है|” डॉ भीमराव आंबेडकर के विचार:-

1. “यह कहने से बात नहीं बनती कि हर पुरानी बात सोने के बराबर होती है| लकीर के फकीर बनके काम नहीं चलता कि जो बाप-दादा करते आये हैं, वह सब औलाद को भी करना चाहिए| सोचने का यह तरीका ठीक नहीं है, परिस्थिति के बदलने के साथ-साथ विचार भी बदलने चाहिए यह जरूरी है|”

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2. मराड़ सत्याग्रह के समय उनके अनुयायियों ने मारपीट करने की ठानी तो डॉ भीमराव आंबेडकर ने कहा, “अपने से बाहर न होओ| अपने हाथ न उठाओ| अपने गुस्से को पीकर मन शांत रखो, हक के लिए झगड़ा नहीं करना है| हमें उनके वारों को सहना पड़ेगा और उन सनातनियों को अहिंसा की शक्ति के दर्शन करवाने होंगे|”

3. डॉ भीमराव आंबेडकर अपने मुक्ति आन्दोलन के बारे स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि “मेरा ये आन्दोलन ब्राह्मणों के खिलाफ नहीं, ब्राह्मणवाद के खिलाफ है| सारे ब्राह्मण दलितों का विरोध करते हैं, ऐसी बात नहीं है और गैर-ब्राह्मणों में भी तो ऊंच-नीच का भेद रखने वाले लोग हैं, ये न भूलों|”

4. पहली गोलमेज सभा में 31 दिसम्बर 1930 को बाबा साहेब ने कहा, “बरतानवी हुकूमत कायम करने में जिन अछूतों को प्रयोग किया गया है, उनकी हालत सुधारने के लिए अंग्रेजों ने बिल्कुल ध्यान नहीं दिया| हिन्दू समाज द्वारा अछूतों पर अत्याचार हो रहे हैं| फिर भी आजादी के बाद ही उनका कल्याण सम्भव हो सकेगा|”

5. जब उन्हें एक बार सम्मान दिया गया तो अपनी सफलता का सेहरा जनता को देते हुए उन्होंने कहा, “हिन्दू समाज की आने वाली पीढी यह फैसला देगी कि मैंने अपने देश के लिए सही और नेक काम किया है, तुम लोग मुझे देवता न बनाओ|”         -डॉ भीमराव आंबेडकर

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6. संविधान के बारे में वे कहते है, “शरीर के पहरावे के लिए बनाये गये सूट की तरह, संविधान भी देश के योग्य होना चाहिए| जिस तरह कमजोर शरीर वाले व्यक्ति के कपड़े मेरे लिए ठीक नहीं है, उसी तरह देश के लिए वह कोई लाभ नहीं पहुंचा सकता| लोकतंत्र का अर्थ है बहुजन का राज| इसलिए इस देश में या तो हिन्दुओं का राज रहेगा या फिर इस बहुमत का जिसमें अछूत, आदिवासी और कम जनंसख्या वाले है, उनके प्रति क्या नीति अपनाई जायेगी, यह महत्वपूर्ण है|”

7. वे कहते हैं, “हमें किसी का आर्शीवाद नहीं चाहिए| हम अपनी हिम्मत, बुद्धि तथा कार्य योग्यता के बल पर अपने देश तथा अपने लिये पूरी लग्न के साथ काम करेंगे| जो भी जागृत है, संघर्ष करता है, उसे अंत में स्थायी न्याय मिल सकता है|”

8. डॉ भीमराव आंबेडकर ने अपने ग्रंथ ‘वु वर दि सुदराज’ कि भूमिका में लिखा है, “ऐतिहासिक सच की खोज करने के लिए मैं पवित्र धर्म ग्रन्थों का अनुवाद करना चाहता हूं| इससे हिन्दुओं के पता चल सकेगा कि उनके समाज, देश के पतन और विनाश का कारण बना है- इन धर्मों के सिद्धान्त| दूसरी बात यह है कि भवभूति के कथनानुनसार काल अनंत है और धरती अपार है, कभी न कभी कोई ऐसा इन्सान पैदा होगा, जो मैं कुछ कह रहा हूँ, उस पर विचार करेगा|” इस ग्रंथ को उन्होंने आधुनिक भारत के सबसे उत्तम पुरुष ज्योतिबा फुले को समर्पित किया है|

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9. बौद्ध धर्म के बारे में वे 15 मई 1956 को अपने भाषण में कहते हैं, “मुझे बौद्ध धर्म, उसके तीन सिद्धान्त ज्ञान, दया और बराबरी के कारण ज्यादा प्यारा है| परमात्मा या आत्मा समाज को, उसके पतन से नहीं बचा सकती है| बुद्ध की शिक्षा ही बिना खून क्रांति द्वारा साम्यवाद ला सकती है|”

10. धर्म के बारे में वे कहते हैं-

अ) समाज को बंधन की जरूरत है, उसे नीति चाहिए|

ब) यदि धर्म उपयोगी है, तो वह विवेक पर आधारित और उपयोगी होना चाहिए|

स) धर्म के नीति-नियम ऐसे होने चाहिए, जो बराबरी, स्वतन्त्रता और भाई-चारे के साथ जुड़े हो|         -डॉ भीमराव आंबेडकर

11. “ऊची इच्छा और आशावादी सोच के साथ ही ऊँची स्थिति को प्राप्त किया जा सकता है| जिसने अपने दिल में उम्मीद, उमंग और इच्छा की लौ जगा ली है, वही व्यक्ति सदा जिंदादिल रहता है| चरित्रवान् होना, उसकी वृद्धि करना, जिन्दगी का पहला फर्ज है उसका पूरी तरह विकास करो| उसे निर्मल बनाओ, पुरानी रूढियों और रिवाजों को दफना दो| नई कलम से नया सबक लिखो, हमेशा आशावान रहो| मेहनत और कुर्बानी से कर्तव्य पूरा होता है| इन्सान की अच्छी प्रथाओं से राष्ट्र और समाज बलवान तथा भाग्यशाली होते है|”

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12. “जिन लोगों की जन-आन्दोलनों में रूचि है, उन्हें केवल धार्मिक दृष्टिकोण अपनाना छोड़ देना चाहिए| उन्हें भारत के लोगों के प्रति सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टिकोण ही अपनाना होगा|”

13. जीवन लंबा होने की बजाये महान होना चाहिए|

14. यदि हम एक संयुक्त एकीकृत आधुनिक भारत चाहते हैं, तो सभी धर्मों के शास्त्रों की संप्रभुता का अंत होना चाहिए|

15. मनुष्य नश्वर है, उसी तरह विचार भी नश्वर हैं| एक विचार को प्रचार-प्रसार की जरूरत होती है, जैसे कि एक पौधे को पानी की, नहीं तो दोनों मुरझाकर मर जाते हैं|         -डॉ भीमराव आंबेडकर

16. हिन्दू धर्म में विवेक, कारण और स्वतंत्र सोच के विकास के लिए कोई गुंजाइश नहीं है|

17. पति-पत्नी के बीच का संबंध घनिष्ठ मित्रों के संबंध के समान होना चाहिए|

18. जब तक आप सामाजिक स्वतंत्रता नहीं हासिल कर लेते, कानून आपको जो भी स्वतंत्रता देता है, वो आपके किसी काम की नहीं|

19. बुद्धि का विकास मानव के अस्तित्व का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए|

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20. कानून और व्यवस्था राजनीतिक शरीर की दवा है और जब राजनीतिक शरीर बीमार पड़े तो दवा जरूर दी जानी चाहिए|         -डॉ भीमराव आंबेडकर

21. इतिहास बताता है कि जहां नैतिकता और अर्थशास्त्र के बीच संघर्ष होता है, वहां जीत हमेशा अर्थशास्त्र की होती है| निहित स्वार्थों को तब तक स्वेच्छा से नहीं छोड़ा गया है, जब तक कि मजबूर करने के लिए पर्याप्त बल न लगाया गया हो|

22. एक महान आदमी एक प्रतिष्ठित आदमी से इस तरह से अलग होता है कि वह समाज का नौकर बनने को तैयार रहता है|

23. हर व्यक्ति जो मिल के सिद्धांत कि ‘एक देश दूसरे देश पर शासन नहीं कर सकता’ को दोहराता है उसे ये भी स्वीकार करना चाहिए कि एक वर्ग दूसरे वर्ग पर शासन नहीं कर सकता|

24. समानता एक कल्पना हो सकती है, लेकिन फिर भी इसे एक गवर्निंग सिद्धांत रूप में स्वीकार करना होगा|

25. मैं ऐसे धर्म को मानता हूं, जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाए|

डॉ भीमराव आंबेडकर के अनुसार एक देश के लिए इन चार मूल्यों स्वतन्त्रता, एकता, बंधुता और न्याय बहुत आवश्यक है| उनके अनुसार, जिस समाज में कुछ वर्गों के लोग जो कुछ चाहे वह सब कर सके और बाकि वह सब भी न कर सकें| जो उन्हें करना चाहिए, उस समाज के अपने गुण होंगे, लेकिन उसमें स्वतन्त्रता शामिल नहीं होगी| अगर इंसानों के अनुरूप जीने की सुविधा कुछ लोगों तक ही सीमित है, तब जिस सुविधा को आमतौर पर स्वतन्त्रता कहा जाता है, उसे विशेषाधिकार कहना उचित होगा|         -डॉ भीमराव आंबेडकर

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स्वामी विवेकानंद के अनमोल विचार: आपको लाइफ में हौसला देंगे

November 24, 2017 by Bhupender Choudhary Leave a Comment

भारत के सबसे महान आध्यात्मिक नेताओं में से एक, स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda) को हिंदू दर्शन की महिमा को वैश्विक मंच पर लाने का श्रेय दिया जाता है| 12 जनवरी, 1863 को कोलकाता में एक कुलीन बंगाली कायस्थ परिवार में नरेंद्र नाथ दत्त के रूप में जन्मे, वे दक्षिणेश्वर के प्रसिद्ध संत स्वामी रामकृष्ण परमहंस के शिष्य बन गए| उन्होंने सांसारिक सुखों को त्याग दिया और एक सन्यासी बन गए, लक्ष्यहीन रूप से घूमने के लिए नहीं, बल्कि मानवता की सेवा के लिए|

स्वामी विवेकानंद भारतीय वेदांत और योग के दर्शन को दुनिया के सामने लाने के लिए एक प्रमुख व्यक्ति थे जिन्होंने भारत को दुनिया के आध्यात्मिक मानचित्र पर रखा| 1893 शिकागो में विश्व धर्म संसद में उनके प्रसिद्ध भाषण ने हमेशा के लिए दुनिया में भारत को देखने के तरीके को बदल दिया| रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन के संस्थापक, विवेकानंद ने न केवल हमारी प्राचीन विरासत को पुनर्जीवित किया, बल्कि लोगों की धार्मिक चेतना को प्रबुद्ध और जागृत किया और दलितों के उत्थान के लिए काम किया|

उन्हें अंतर-धार्मिक जागरूकता बढ़ाने, हिंदू धर्म को पुनर्जीवित करने और 19 वीं शताब्दी में भारत में राष्ट्रवाद के विचार में योगदान देने का श्रेय भी दिया जाता है| महान संत स्वामी विवेकानंद के उद्धरणों का यह अद्भुत संग्रह निश्चित रूप से आपको प्रबुद्ध करेगा और आपके अस्तित्व संबंधी प्रश्नों के उत्तर खोजने में आपकी सहायता करेगा, जो आज भी प्रासंगिक हैं|

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स्वामी विवेकानंद के अनमोल वचन

भारत के महान आध्यात्मिक नेताओं में से एक, और हिंदू दर्शन की महिमा को वैश्विक मंच पर लाने वाले स्वामी विवेकानंद के कहे अनेक अनमोल विचार हैं, जिन्हें हर भारतीयों को जानना चाहिए| जो इस प्रकार है, जैसे-

स्वामी विवेकानंद के 10 अनमोल विचार

1. उठो और जागो और तब तक रुको नही जब तक की तुम अपना लक्ष्य प्राप्त नही कर लेते|

2. पवित्रता, धैर्य और उधम- ये तीनों गुण मै एक साथ चाहता हूँ|

3. पढ़ने के लिए जरूरी है एकाग्रता, एकाग्रता के लिए जरूरी है ध्यान| ध्यान से ही हम इन्द्रियों पर संयम रखकर एकाग्रता प्राप्त कर सकते है|

4. ज्ञान स्वयं में वर्तमान है, मनुष्य केवल उसका अविष्कार करता है|

5. जब तक जीना, तब तक सीखना| अनुभव ही जगत में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक है|                -स्वामी विवेकानंद

6. जितना बड़ा संघर्ष होगा, जीत उतनी ही शानदार होगी|

7. लोग तुम्हारी स्तुति करे या निंदा, लक्ष्य तुम्हारे उपर कृपालु हो या न हो| तुम्हारा देहांत आज हो या युग में, तुम न्याय पथ से भ्रष्ट मत होना|

8. एक समय में एक काम करो, और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमें डाल दो और बाकी सब भूल जाओ|

9. जिस समय जिस काम के लिए प्रतिज्ञा करो| ठीक उसी समय उसे करना ही चाहिए, नही तो लोगो का विश्वास उठ जाता है|

10. जब तक आप खुद पे विश्वास नही करते, तब तक आप भगवान पे विश्वास नही कर सकते|                -स्वामी विवेकानंद

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स्वामी विवेकानंद के 20 अनमोल विचार

11. अगर धन दूसरों की भलाई करने में मदद करता है, तो ही इसका कुछ मूल्य है| अन्यथा यह बुराई का एक ढेर है, इसे जितना जल्दी छुटकारा मिल जाये उतना अच्छा है|

12. अकेले रहो, जो अकेला रहता है, उसका किसी से कोई विरोध नही होता| वह किसी की शान्ति भंग नही करता, न दूसरा कोई उसकी शान्ति भंग करता|

13. अगर कोई इंसान बेहतर तरीके से खुद पर विश्वास करना सिख जाये, और ऐसा करने का अभ्यास करे तो मुझे लगता है, की हमारे अन्दर का दुःख और बुराइयाँ काफी हद तक दूर हो सकती है|

14. अगर आप ईश्वर को अपने भीतर, और दुसरे वन्य जीवों में नही देख पाते, तो आप ईश्वर को कही भी नही पा सकते|

15. अगर एक शब्द में कहा जाए तो, तुम ही परमात्मा, यही सत्य है|                -स्वामी विवेकानंद

16. अपने आप में विश्वास रखना और सत्य का पालन करना ही सबसे बड़ा धर्म है|

17. अगर आप निस्वार्थ है, तो आप बिना धार्मिक पुस्तक पढ़े, बिना मन्दिर या मस्जिद जाए भी सम्पूर्ण है|

18. अपने लिए एक लक्ष्य बनाओ, और उस लक्ष्य को अपना जीवन बनाओ, उसी के बारे में सोचो, उसी के सपने देखो, उसी लक्ष्य के लिए जिओ, अपना तन मन दिमाग, को उसी में लगाओ और सारी चिंताओ को भूल जाओ, यही सफलता का एकमात्र सही रास्ता है|

19. अगर आप को तैतीस करोड़ देवी-देवताओं पर भरोसा है, लेकिन खुद पर नही| तो आप को मुक्ति नही मिल सकती, खुद पर भरोसा रखे, अडिंग रहे और मजबूत बने, हमे इसकी ही जरूरत है|

20. आओ हम नाम यश और दूसरों पर शासन करने की इच्छा से रहित हो कर काम करे| काम, क्रोध व लोभ इस त्रिविध बन्धन से मुक्त हो जाए और फिर सत्य भी हमारे साथ रहेगा|                -स्वामी विवेकानंद

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स्वामी विवेकानंद के 30 अनमोल विचार

21. आप ईश्वर में तब तक विश्वास नही कर पाएगे, जब तक आप अपने आप में विश्वास नही करते|

22. आकांशा, अज्ञानता और असमानता यह बंधन की त्रिमूर्तियां है|

23. आध्यात्मिक दृष्टि से विकसित हो चुकने पर धर्मसंघ में बना रहना अवांछनीय है| उससे बहार निकलकर स्वाधीनता की मुक्त वायु में जीवन व्यतीत करो|

24. आज अपने देश को आवश्यकता है, लोहे के समान मासंपेसियों और वज्र के समान स्नायुओ की हम बहुत दिनों तक रों चुके| अब और रोने की आवश्यकता नही| अब अपने पैरो पर खड़े होओं और मनुष्य बनो|

25. आदर्श, अनुशासन, मर्यादा, परिश्रम, ईमानदारी तथा उच्च मानवीय मूल्यों के बिना किसी का जीवन महान नही बन सकता है|                -स्वामी विवेकानंद

26. आप को अपने भीतर से ही विकास करना होता है| आपको कोई सिखा नही सकता, आप को कोई अध्यात्मिक नही बना सकता| आप को कोई सिखाने वाला और कोई नही, सिर्फ आप की आत्मा ही है|

27. उस व्यक्ति ने अमरत्व प्राप्त कर लिया है, जो किसी सांसारिक वस्तु से व्याकुल नही होता|

28. आपदा ही एक ऐसी स्तिथि है, जो हमारे जीवन की गहराईयों में अन्तदृष्टी पैदा करती है|

29. उठो मेरे शेरो, इस भ्रम को मिटा दो की तुम निर्बल हो, तुम एक अमर आत्मा हो, स्वच्छंद जीव हो, धन्य हो, सनातन हो, तुम तत्व नही हो, ना ही शरीर हो, तत्व तुम्हारा सेवक है, तुम तत्व के सेवक नही हो|

30. ईर्ष्या तथा अहंकार को दूर कर दो- संगठित होकर दूसरों के लिए कार्य करना सीखो|                -स्वामी विवेकानंद

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स्वामी विवेकानंद के 40 अनमोल विचार

31. इंसान को कठिनाईयों की आवश्यकता होती है, क्यों की सफलता का आनन्द उठाने के लिए ये जरूरी है|

32. एक ऐसी भूमि जहाँ के लोग, पवित्रता की और उदारता की और मानवता शांति की और अग्रसर है, वो भारत भूमि है|

33. इस पुरे ब्रह्माण्ड में जो शक्ति है, वो सब हममें मोजूद है और वो हम ही है, जो खुद अपनी आखें बंद करके अंधकार में शक्तियों को नही पहचान पा रहे है|

34. एक चट्टान के रूप में खड़े हो जाओ: आप अविनाशी है आप स्वयं(आत्मा) ब्रह्माण्ड के भगवान है|

35. कामनाएं समुंद्र की तरह अतृप्त है, पूर्ति का प्रयास करने पर उनका कोलाहल और बढ़ता है|                -स्वामी विवेकानंद

36. एक नायक बनो और सदेव कहो मुझे कोई डर नही है|

37. कर्म का सिद्धांत कहता है जैसा कर्म वैसा फल आज का प्रारम्भ पुरुषार्थ पर अवलम्बित है| आप ही अपने भाग्यविधाता है, यह बात ध्यान में रखकर कठोर परिश्रम पुरुषार्थ में लग जाना चाहिए|

38. किसी की निंदा ना करें, अगर आप मदद के लिए हाथ बढ़ा सकते है तो जरुर बढ़ाए| अगर नही बढ़ा सकते, तो अपने हाथ जोडीये, अपने भाइयों को आशीर्वाद दिजिये, उनको अपने मार्ग पर जाने दीजिए|

39. ऐसी चीजे जो आप को कमजोर बनाती है, मानसिक या शारीरिक ऐसी चीजों को जल्द ही त्याग देना चाहिए|

40. कभी भी यह ना सोचे की, आत्मा के लिए कुछ भी असम्भव है|                -स्वामी विवेकानंद

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स्वामी विवेकानंद के 50 अनमोल विचार

41. कायर लोग ही हमेशा पाप करते है, बहादुर नही कभी नही|

42. किसी चीज से डरो मत, तुम अद्भुत काम करोंगे| यह निर्भयता ही है, जो क्षण भर में ही परम आनन्द लाती है|

43. कुछ मत पूछों, बदले में कुछ मत मागों जो देना है| वो दो-वो तुम तक वापिस आएगा, पर उसके बारे में अभी मत सोचों|

44. किसी बात से आप उत्साहिन न होओ, जब तक ईश्वर की कृपा हमारे उपर है| कौन इस पृथ्वी पर हमारी उपेक्षा कर सकता है, यदि तुम अपनी अंतिम साँस भी ले रहे हो तो भी ना डरना| सिंह की शूरता और पुष्प की कोमलता के साथ काम करते रहो|

45. खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है|                -स्वामी विवेकानंद

46. खुद को समझाएं, दूसरों को समझाएं सोई हुई आत्मा को आवाज दे और देखे की यह कसे जागृत होती है| सोई हुई आत्मा के जागृत होने पर ताकत, उन्नति, अच्छाई, सब कुछ आ जायगा|

47. कुछ ईमानदार और उर्जामान लोग एक साल में उतना कार्य कर सकते है, जितना दुसरे लोग सेंकडो सालों में नही कर सकतें|

48. क्या तुम नही अनुभव करते की दूसरों के उपर निर्भर रहना बुद्धिमानी नही है, बुद्धिमान को अपने ही पेरों पर दृढ़ता पूर्वक खड़ा होकर कार्य करना चाहिए| धीरे धीरे सब ठीक हो ही जाता है|

49. जब अंधविश्वास जन्म लेता है, तो मस्तिक चला जाता है|

50. खड़े हो जाओ हिम्मतवान बनो, ताकतवर बन जाओ| सब जबाब दारियां अपने सिर पर ओढ़ लो, और समजो की अपने नसीब के रचियता आप खुद हो|                -स्वामी विवेकानंद

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स्वामी विवेकानंद के 60 अनमोल विचार

51. जन्म, व्याधि, जरा और म्रत्यु ये तो केवल अनुषांगिक है| जीवन में यह अनिवार्य है, यह एक स्वाभाविक घटना है|

52. गम्भीरता की साथ शिशु सरलता को मिलाओ, सबके साथ मेल से रहो| अहंकार के सब भाव छोड़ दो, सम्प्रदायिक विचरों को मन में ना लाओ व्यर्थ विवाद महापाप है|

53. जब में कभी किसी व्यक्ति को उस उपदेश वाणी(श्री रामकृष्ण के शब्द) के बीच पूर्ण रूप से निमग्न पाता हु, जो भविष्य में संसार में शान्ति की वर्षा करने वाली है| तो मेरा ह्रदय आनंद से उछलने लगता है, ऐसे समय में मै पागल नही हो जाता हु, यही आशचर्य की बात है|

54. जब तक लाखों लोग भूखे और अज्ञानी है, तब तक मै प्रत्येक उस व्यक्ति को गद्दार मानता हु| जो उनके बल पर शिक्षित हुआ, और अब वह उन पर ध्यान नही दे रहा|

55. जब कोई विचार अनन्य रूप से मस्तिक पर अधिकार कर लेता है, तब वह मानसिक भौतिक या मानसिक अवस्था में परिवर्तन हो जाता है|                -स्वामी विवेकानंद

56. जब दिल और दिमाक में संघर्ष होता है, तो हमेशा दिल की सुनो|

57. जितना अध्यन करते है, उतना ही हमे अपने अज्ञान का आभास होता जाता है|

58. जब प्रलय का समय आता है, तो समुंद्र भी अपनी मर्यादा छोड़कर किनारों को छोड़ अथवा तोड़ देता है| लेकिन सज्जन पुरुष प्रलय के समान भयंकर विपत्ति में भी अपनी मर्यादा नही बदलते|

59. जिन्दगी बहुत छोटी है, दुनियां में किसी भी चीज का घमंड अस्थाई है| जीवन केवल वही जी रहा है जो दूसरों के लिए जी रहा है, बाकी सभी जीवित से अधिक मृत है|

60. जब लोग तुम्हें गाली दे तो तुम उन्हें आशिर्वाद दो सोचो, तुम्हारे झूठे दंभ को बहार निकलकर वो तुम्हारी कितनी मदद कर रहे है|                -स्वामी विवेकानंद

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स्वामी विवेकानंद के 70 अनमोल विचार

61. जिन्दगी का रास्ता बना बनाया नही मिलता है, स्वयं को बनाना पड़ता है| जिसने जैसा मार्ग बनाया उसे वैसी ही मंजिल मिलती है|

62. हिन्दू संस्कृति आध्यात्मिकता की अमर आधारशिला पर आधारित है|

63. हमें ऐसी शिक्षा चाहिए,जिसमें चरित्र का निर्माण हो, मन की शक्ति बढ़े बुद्धि का विकाश हो, और मनुष्य अपने पैर पर खड़ा हो सके|

64. हमारें व्यक्तित्व की उत्पति हमारे विचारों में है, इसलिए ध्यान रखे की आप क्या विचारते है| शब्द गौण है , विचार मुख्य है और उनका असर दूर दूर तक होता है|

65. हम भारतीय सभी धर्मो के प्रति केवल सहिष्णुता में ही विश्वास नही करते बल्कि सभी धर्मो को सच्चा मानकर उनको स्वीकार भी करते है|                -स्वामी विवेकानंद

66. हम ऐसी शिक्षा चाहते है, जिस में चरित्र निर्माण हो, मानसिक शक्ति का विकास हो, ज्ञान का विस्तार हो और जिससे हम खुद के पैरो पर खड़े होने में सक्षम बन जाए|

67. स्वयं में बहुत सी कमियों के बाबजूद अगर में स्वयं से प्यार कर सकता हूँ, तो दूसरों मै थोड़ी बहुत कमियों की वजह से मै उनसें घृणा कसे कर सकता हूँ|

68. स्वतंत्र होने का साहस करो,जहाँ तक तुम्हारें विचार जाते है| वहा तक जाने का साहस करो, उन्हें अपने जीवन में उतारने का साहस करो|

69. स्त्रियों की स्थिति में सुधार न होने तक, विश्व के कल्याण का कोई मार्ग नही है|

70. सुख और दुःख सिक्के के दो पहलू है, सुख जब मनुष्य के पास आता है तो दुःख का मुकुट पहन कर आता है|                -स्वामी विवेकानंद

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स्वामी विवेकानंद के 80 अनमोल विचार

71. साहसी होकर काम करो धीरज और स्थिरता से काम करना, यही एक मार्ग है आगे बढ़ो और याद रखों|

72. सबसे बड़ा धर्म है, अपने स्वभाव के प्रति सच्चे होना स्वयं पर विश्वास करो|

73. सफलता के तीन आवश्यक अंग है: शुद्धता, धैर्य और दृढ़ता लेकिन इन सबसे बढ़कर जो अवश्यक है वह है प्रेम|

74. सच्ची सफलता और सच्ची खुशी का राज क्या है, जो इंसान बिना किसी स्वार्थपरता के, बिना कुछ मागें लोगो की सेवा करता है वही सच्ची सफलता है|

75. संभव की सीमा जाने का केवल एक ही तरीका है, असम्भव से आगे निकल जाना|                -स्वामी विवेकानंद

76. शुरुआत में ही बड़ी योजनायें मत बनाइए, छोटी शुरुआत करिए फिर आगे बढ़ते रहिए और बढ़ते रहिए|

77. शुभ व स्वस्थ विचारों वाला ही सम्पूर्ण स्वस्थ प्राणी है|

78. विश्व में अधिकांश लोग इसलिए असफल हो जाते है, क्योंकि उनमें समय पर साहस का संचार नही हो पाता वे भयभीत हो उठते है|

79. शिक्षा एक सम्पूर्णता की अभिव्यक्ति है, जो मनुष्य में विध्यमान है|

80. विस्तार जीवन है, संकुचन म्रत्यु है|                -स्वामी विवेकानंद

81. शाररिक, बोद्धिक और अध्यात्मिक रूप से जो कुछ भी कमजोर बनता है, उसे जहर की तरह त्याग दो|

82. शत्रु को पराजित करने के लिए ढाल तथा तलवार की आवश्यकता होती है, इसलिए अंग्रेज़ी और संस्कृत का अध्ययन मन लगा कर करो|

83. विश्व एक व्यायामशाला है, जहाँ हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते है|

84. वस्तुएं बल से छिनी जा सकती है, धन से खरीदी जा सकती है, किन्तु ज्ञान केवल अध्ययन से ही प्राप्त हो सकता है|                -स्वामी विवेकानंद

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