आजादी से पहले रासायनिक उर्वरको का प्रयोग नही किया जाता था या बहुत ही कम मात्रा में किया जाता था| अत: नकली एवं असली की समस्या नही थी| क्योंकि रसायनिक उर्वरकों के स्थान पर कार्बनिक और हरी खादों पर निर्भरता ज्यादा थी| आज हालात ठीक विपरीत है, अब रसायनिक खादों पर निर्भरता ज्यादा है और [Read More] …
Agriculture
खस की खेती: किस्में, बुवाई, सिंचाई, पोषक तत्व, देखभाल, पैदावार
वेटिवर या खस का उद्भव स्थान भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका एवं मलेशिया माना जाता है| खस कड़ी प्रवृत्ति का घास है, जो सूखे की स्थिति एवं जल-जमाव दोनों को बर्दास्त कर लेता है| प्राचीन काल से इसके जड़ों का उपयोग तेल निकालने, चटाइयाँ बनाने एवं औषधीय उपयोग होता रहा है| दक्षिण भारतीय राज्यों में खस [Read More] …
पिप्पली की उन्नत खेती: किस्में, रोपाई, सिंचाई, देखभाल और पैदावार
पिप्पली (Pippali) को हमारे देश में अलग-अलग भाषाओँ में विभिन्न नामों से जाना जाता है, जैसे हिंदी में पीपल| यह एक गन्धयुक्त लता होती है, जो भुमि पर फैलती अथवा दूसरे वृक्षों के सहारे उपर उठती है| इसके रेंगने वाले काण्डों से उपमूल निकलते है| जिनसे इसका आरोहरण तथा प्रसारण होता है| इसकी पत्तियां पान [Read More] …
पत्थरचूर की उन्नत खेती: किस्में, रोपाई, सिंचाई, देखभाल और पैदावार
पत्थरचूर जिसे पाषाणभेद अथवा कोलियस फोर्सकोली भी कहा जाता है, उस औषधीय पौधों में से है, वैज्ञानिक आधारों पर जिनकी औषधीय उपयोगिता हाल ही में स्थापित हुई है| वर्तमान में भारतवर्ष के विभिन्न भागों जैसे तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक तथा राजस्थान में इसकी विधिवत खेती भी प्रारंभ हो चुकी है, जो काफी सफल रही है| [Read More] …
गुग्गल की उन्नत खेती: किस्में, रोपाई, सिंचाई, देखभाल और पैदावार
गुग्गल (Guggul) या गुगल का पौधा भारत में राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, आसाम, सिलहट, बंगाल, मैसूर आदि स्थानों पर जंगलो में प्राकतिक रूप में पाया जाता है| गुग्गल का पौधा जंगल में झाडियों के रूप में पाया जाता है| इसकी शाखाएं छोटी व टेढ़ी-मेढी होती है| ये शाखाएं कांटेदार व विभिन्न रंगो वाली होती है| इसकी [Read More] …
एलोवेरा की उन्नत खेती: किस्में, रोपाई, सिंचाई, देखभाल और पैदावार
एलोवेरा (Aloe Vera) शुष्क क्षेत्र की एक बहुउपयोगी वनस्पति है| भारत में यह घृतकुमारी, घीकुंआर, मुसाबर, ग्वारपाठा इत्यादि नामों से प्रसिद्ध है| यह उष्ण क्षेत्रानुकूल वनस्पति है| इसलिए इसे शुष्क प्रदेशों में जहाँ पानी की सुविधा कम हो सरलता से उगाया जा सकता है| एलोवेरा लिलिएसी कुल का सदस्य है| इसकी पत्तियाँ मांसल (गुद्देदार) तथा [Read More] …





