सर्दियों में पशुओं को ठंड लगने की आशंका रहती है, जिससे पशुओं के स्वास्थ्य पर तो विपरीत असर पड़ता ही है, साथ ही साथ दूध उत्पादन भी प्रभावित होता है। इससे पशुपालकों को बहुत हानि उठानी पड़ती है। इस हानि से बचने के लिए पशुओं को सर्दी से बचना बहुत आवश्यक है। सर्दियों में तापमान बहुत कम हो जाता है, तथा ठंडी हवा चलती है।
इन दिनों पशुओं को सर्दी, धुंध और ठंडी हवा से बचाने के लिए पूर्ण प्रबंधन करने चाहिएं। पशुओं को सर्दी लगने से दूध के उत्पादन में कमी आ सकती है एवं पशु बीमार भी हो सकते हैं। इसलिए भैंसों और अपनी गायों से सर्दियों में अच्छा दूध लेने के लिए कुछ उपाय इस प्रकार है, जैसे-
यह भी पढ़ें- अगस्त महीने में पशुओं की देखभाल के आवश्यक उपाय
पशुओं को सर्दी से बचाने के उपाय
1. अपने पशुओं को सर्दी से बचाव के लिए पशुशाला में रात को बोरी इत्यादि व ज्वार या बाजरे की कड़वी एवं टाट बांधकर हवा और सर्दी से बचाव करें।
2. सर्दियों के दिनों में पशुओं को धूप में बांधे, परन्तु ठंडी हवा से बचाव करना जरूरी है।
3. पशुओं के बैठने के स्थान को सूखा रखने का प्रयास करें, पुआल या कोई नर्म, सस्ती तथा पानी चूसने वाली चीज पशुओं के नीचे फर्श पर डालें, जिससे फर्श सूखा रहे और सफाई भी आसानी से हो सके।
4. पशु को ताजा पानी ही पिलाएं, जो अधिक ठंडा या अधिक गर्म न हो।
5. पशुओं को बरसीम या अन्य का हरा चारा खिलाने से पहले थोड़ा-सा सूखा चारा खिलाएं या बरसीम आदि, के चारे को सूखे चारे में मिलाकर खिलाना चाहिए, ताकि पशु को अफारा न हो।
6. यदि पशु को अफारा हो जाए तो आधा लीटर अलसी या सरसों का तेल 60 मिलीलीटर तारपीन के तेल में मिलाकर दें, इसके साथ साथ हिमालय बतीसा 50 से 60 ग्राम भी दें, यह भी लाभकारी सिद्ध होगा।
यह भी पढ़ें- जुलाई महीने में पशुओं की देखभाल कैसे करें
7. प्रत्येक गाय या भैंस को 50 से 60 ग्राम नमक एवं खनिज मिश्रण रोजाना खिलाएं, इससे पशु में खनिज पदार्थ की कमी नहीं आती और पशु का दूध ठीक उतरेगा व प्रजनन सुचारू रूप से होगा।
8. सर्दियों में रात को सूखा चारा खिलाना लाभदायक रहता है, इससे पशुओं में तापमान का संतुलन बनता है।
9. जो पशु को धान की पुआली खिलाते हैं, वे ध्यान रखें कि पुआल में फफूद न लगी हो वरना पशुओं में डेगनाला बीमारी होने का डर रहता है।
10. पशु को साफ तथा सूखा रखें, यदि अधिक सर्दी एवं तेज हवा चलती हो तो नहलाने की बजाय पशु को मोटे ब्रुश से रगड़कर साफ करें।
11. हर समय पालतू या बंधे पशु को थोड़ी देर व्यायाम के लिए खुला छोड़ दें, खासतौर पर नवजात बच्चों को व्यायाम कराना बहुत लाभदायक रहता है।
12. बछड़े-बछड़ियों और कटड़े-कटड़ियों के पेट में जूण पड़ने व सर्दी लगने के कारण बहुत अधिक संख्या में मृत्यु होने का डर होता है। इसलिए पेट के कीड़ों से रहित करने के लिए पहली बार 7 से 10 दिन की आयु में एवं इसके बाद प्रति माह दवाई पशु चिकित्सालय से दिलाएं।
13. बाहरी परजीवियों को नष्ट करने के लिए पशुओं के शरीर पर एवं पशुशाला में मैलाथियान या सुमिथियान क्रमशः 0.1 प्रतिशत या 0.3 प्रतिशत घोल को छिड़कें। अपने पशु को बीमारियों से बचाव के टीके उचित समय पर लगवाएं।
यह भी पढ़ें- पशुओं को सर्दी से कैसे बचाएं: जाने उपयोगी उपाय
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न?
ठंडी हवा, ओस, और पाला। ये पशुओ को ठंड और बीमारियों से प्रभावित कर सकते हैं।
अधिकांश घराने के पशुओं के लिए 10°C से 25°C के बीच का तापमान सुरक्षित माना जाता है।
शेड को बंद और हवा आने से बचाने वाला बनाएं। फर्श पर सूखी घास, पुआल या स्ट्रॉ बिछाएँ।
हां, सर्दियों में ऊर्जा की जरूरत बढ़ती है। अधिक पौष्टिक चारा और घास देना चाहिए।
सूखा चारा (हायड्रेटेड फोरेज), भूसा, मूंग या गेहूँ की भूसी, और जरूरी हो तो पशु आहार सप्लीमेंट।
उन्हें गर्म, ड्राई और ठंडी हवा से सुरक्षित जगह पर रखें। हल्का कंबल या पुआल का बिस्तर दें।
ठंड से पशुओ में निमोनिया, खांसी, जुकाम और दस्त जैसी समस्याएं अधिक होती हैं।
अगर पशु ठंड से परेशान हो तो दूध उत्पादन घट सकता है। पर्याप्त पोषण और गर्म शेड इसे कम कर सकता है।
हां, दिन के समय हल्की धूप देना फायदेमंद है। यह उन्हें गर्म रखता है और स्वास्थ्य बढ़ाता है।
उन्हें अधिक गर्म, साफ और सुरक्षित जगह पर रखें। पौष्टिक चारा दें और जरूरत पड़ने पर पशु चिकित्सक की सलाह लें।
यह भी पढ़ें- सर्रा रोग से पशुओं को कैसे बचाएं: लक्षण और इलाज
आप अपने विचार या प्रश्न नीचे Comment बॉक्स के माध्यम से व्यक्त कर सकते है। कृपया वीडियो ट्यूटोरियल के लिए हमारे YouTube चैनल को सब्सक्राइब करें। आप हमारे साथ Instagram और Twitter तथा Facebook के द्वारा भी जुड़ सकते हैं।
Leave a Reply