संयुक्त राज्य अमेरिका के 18वें राष्ट्रपति और गृहयुद्ध के दौरान एक प्रमुख संघीय जनरल, यूलिसिस एस ग्रांट (जन्म: 27 अप्रैल 1822 – मृत्यु: 23 जुलाई 1885) को अक्सर अमेरिकी इतिहास को आकार देने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए याद किया जाता है। अपनी सैन्य और राजनीतिक उपलब्धियों के अलावा, यूलिसिस एस ग्रांट के शब्द गहन ज्ञान और अंतर्दृष्टि से भरपूर हैं, जो नेतृत्व, लचीलेपन और स्वतंत्रता एवं समानता के महत्व पर मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
यह लेख यूलिसिस एस ग्रांट के कुछ सबसे प्रभावशाली उद्धरणों पर गहराई से चर्चा करता है, उनके संदर्भ और प्रासंगिकता की पड़ताल करता है और इस बात पर विचार करता है कि कैसे यूलिसिस एस ग्रांट के विचार आज भी नेताओं और व्यक्तियों को प्रेरित करते हैं। उनके विश्वासों और अनुभवों का सावधानीपूर्वक अध्ययन करके, हम ऐसे मूल्यवान सबक प्राप्त कर सकते हैं जो समय से परे हैं और हमारी समकालीन दुनिया में प्रासंगिक बने हुए हैं।
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यूलिसिस एस ग्रांट के उद्धरण
“हर युद्ध में एक समय ऐसा आता है, जब दोनों पक्ष स्वयं को पराजित मानते हैं, उस समय जो व्यक्ति लड़ाई जारी रखता है, वही जीतता है।”
“युद्ध की कला बहुत सरल है, जानो कि तुम्हारा शत्रु कहाँ है, जितनी जल्दी हो सके उस पर पहुँचो, जितनी शक्ति से हो सके प्रहार करो और आगे बढ़ते रहो।”
“ऐसा कभी समय नहीं था, जब मेरी राय में तलवार निकालने से बचने का कोई रास्ता न रहा हो।”
“जो लोग नियमों की गुलामी में युद्ध करते हैं, वे असफल होते हैं।”
“युद्ध कई झूठी कहानियाँ उत्पन्न करता है, जिनमें से कुछ को इतनी बार दोहराया जाता है कि वे सत्य मान ली जाती हैं।”
“मैं इस मोर्चे पर तब तक लड़ता रहूँगा, जब तक पूरी गर्मी बीत न जाए।”
“युद्ध के दौरान पीछे की पंक्ति में रहकर मोर्चे की स्थिति का सही निर्णय नहीं किया जा सकता।”
“मैंने कभी युद्ध की वकालत नहीं की, सिवाय इसके कि वह शांति का साधन हो।”
“युद्ध की कला उस समय हासिल करना है, जब आपकी शक्ति कमजोर हो।”
“हालाँकि मैं एक सैनिक के रूप में प्रशिक्षित हुआ, लेकिन मैं युद्धप्रिय व्यक्ति नहीं हूँ।”
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“हमें शांति चाहिए।”
“बुरे या अप्रिय कानूनों को समाप्त करने का सबसे प्रभावी तरीका है, उनका कड़ाई से पालन करवाना।”
“श्रम किसी व्यक्ति का अपमान नहीं करता, लेकिन कभी-कभी व्यक्ति श्रम का अपमान करते हैं।”
“हमारी सबसे बड़ी विजय कभी न गिरने में नहीं है, बल्कि हर बार गिरकर उठने में है।”
“संघ को अपने स्वतंत्रता के आधारस्तंभ की तरह थामे रखो।”
“क्रांति का अधिकार मनुष्य में जन्मजात है।”
“मेरा सौभाग्य या दुर्भाग्य, यह था कि मुझे किसी भी राजनीतिक प्रशिक्षण के बिना राष्ट्राध्यक्ष बना दिया गया।”
“जनता की इच्छा सबसे बड़ा कानून है।”
“हर इंसान को सम्मान और शिष्टाचार का अधिकार है।”
“हमें शांति चाहिए, लेकिन ऐसी शांति जो टिकाऊ हो।”
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“जो मित्र मेरे दुःख के समय में मेरे साथ रहा, वही मेरा सच्चा मित्र है।”
“मैंने अपने जीवन में कभी युद्ध परिषद नहीं बुलाई। मैंने सबकी राय सुनी, लेकिन अंत में अपना निर्णय खुद किया।”
“मैं सैनिक इसलिए बना क्योंकि अपने देश की सेवा का और कोई मार्ग नहीं दिखा।”
“मैंने यह नियम बनाया था कि किसी व्यक्ति पर भरोसा करता रहूँ, जब तक कि वह पूरी तरह अविश्वसनीय साबित न हो जाए, लेकिन अब मैं नहीं जानता कि फिर किसी पर विश्वास कर पाऊँगा या नहीं।”
“मेरी एक ही नीति है, सही काम करना और अपने देश की पूरी निष्ठा से सेवा करना।”
“किसी व्यक्ति के चरित्र की असली परीक्षा यह है कि वह तब क्या करता है, जब कोई उसे देख नहीं रहा।”
“मेरी असफलताएँ निर्णय की त्रुटियाँ थीं, न कि मंशा की।”
“कोई व्यक्ति तब तक सही कार्य नहीं कर सकता, जब तक वह सही सोच नहीं रखता।”
“ईमानदारी को थामे रखो, क्योंकि जब यह खो जाती है, तो सब कुछ खो जाता है।”
“मैंने तय किया था कि जब तक मेरी सेना तैयार न हो, तब तक नहीं बढ़ूँगा और जब बढ़ूँगा तो तेजी से।”
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“हालाँकि मैं पेशे से सैनिक हूँ, लेकिन मुझे युद्ध के प्रति कोई आकर्षण नहीं रहा।”
“यदि सभी के अधिकारों का सम्मान किया जाए, तो शांति बनी रहती है।”
“हमें न्याय के माध्यम से शांति और समृद्धि प्राप्त करनी चाहिए।”
“शांति बनाए रखने का सर्वोत्तम साधन है, युद्ध के लिए तैयार रहना।”
“युद्धों का भुगतान युद्ध के दौरान नहीं किया जाता, बिल बाद में आता है।”
“हमें शांति चाहिए, लेकिन अत्याचारियों की नहीं, स्वतंत्र मनुष्यों की शांति।”
“राष्ट्रों को भी उनकी गलतियों के लिए उसी प्रकार दंड मिलता है, जैसे व्यक्तियों को।”
“स्वतंत्रता के बिना शांति, दासता है।”
“किसी शत्रु को नष्ट करने का सबसे अच्छा तरीका है, उसे मित्र बना लेना।”
“हमें शांति चाहिए, लेकिन सम्मानपूर्ण शांति।”
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“अनुभव हमें केवल यह सिखाता है कि हम अनुभव से कुछ नहीं सीखते।”
“मैं कभी भयभीत नहीं हुआ, मुझे हमेशा विश्वास रहा कि सत्य ही शक्ति है।”
“अतीत पर रोना नहीं चाहिए, उससे सीखना चाहिए।”
“इतिहास हमें सिखाता है कि शांति की रक्षा सजगता से की जाती है।”
“मैंने हर परिस्थिति में सही, संवैधानिक और जनहित में कार्य करने की कोशिश की है।”
“भविष्य आशा से भरा होता है, यदि वह न्याय पर आधारित हो।”
“साहस और दृढ़ता में एक जादुई शक्ति होती है, जो कठिनाइयों को दूर कर देती है।”
“हमें ऐसी शांति चाहिए, जो सत्य पर आधारित हो, समझौते पर नहीं।”
“मेरे हर आदेश का अर्थ वही था, जो मैंने कहा और मैं दूसरों से भी यही अपेक्षा करता था।”
“हमें शांति चाहिए, जो स्वतंत्रता का सच्चा स्मारक हो।”
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