चावल (Rice) भारत के लगभग हर घर में आहर के रूप में प्रयोग किया जाता है, चाहे उसका खाने के प्रयोग किसे भी व्यंजन के रूप में ही क्यों ना किया जाए| आप अनेक रूप में चावल (Rice) के अनेक व्यंजन बना सकते है| जो की बहुत ही लजीज और स्वादिस्ट होते है| लेकिन क्या [Read More] …
चावल के औषधीय गुण | चावल के फायदे | चावल के नुकसान
चावल के औषधीय गुण और फायदे यह वह हर इन्सान जानना चाहता है, जो इसका उपयोग किसी ना किसी रूप में करता है| चावल (Rices) ज्यादतर हमारे भोजन में शामिल होने वाला अनाज है| कुछ लोग इसे मोटापा बढ़ाने वाला आहर मानते है| लिकिन यह बिलकुल गलत है| इसको भूख के अनुसार खाया जाए तो [Read More] …
जिमीकंद की खेती: किस्में, बुवाई, सिंचाई, देखभाल और पैदावार
जिमीकंद या सूरन एक भूमिगत कंद है| जो इसकी उपज क्षमता तथा पाक गुणों के कारण लोकप्रिय हो रहा हैं| उच्च उपज, गैर-तीखेपन वाले किस्मों के प्रवेश के कारण इसे पूरे भारत में व्यावसायिक उत्पादन हेतु अपनाया जा रहा हैं| यह कार्बोहाइड्रेट और खनिजों जैसे कैल्शियम और फॉस्फोरस से समृद्ध हैं| बवासीर, पेचिश, दमा, फेफड़ों [Read More] …
शलजम की खेती: किस्में, बुवाई, सिंचाई, प्रबंधन, देखभाल, पैदावार
शलजम (Turnip) भारत के अधिकतर हिस्सों की फसल है| यह एक जड़ का फल या सब्जी है, जिसका उपयोग सलाद या सब्जी के रूप में किया जाता है| शलजम विटामिन और खनिज का स्रोत है| इसका वनस्पति भाग पशुओं के लिए पौष्टिक आहर है| किसान भाई आधुनिक तकनीकी से इसकी खेती कर के अच्छा मुनाफा [Read More] …
मूली की खेती: किस्में, बुवाई, सिंचाई, प्रबंधन, देखभाल और पैदावार
हमारे देश में मूली की खेती (Radish farming) प्रायः सभी क्षेत्रों में की जाती है| सामान्यतः सब्जी उत्पादक कृषक सब्जियों की अन्य फसलों की मेढ़ों पर या छोटे-छोटे क्षेत्रों में मूली लगाकर आय अर्जित करते है| शीत ऋतु में भी कृषक इसकी फसल को 30 से 60 दिन में तैयार कर पुनः बोवनी कर दो [Read More] …
पालक की खेती: किस्में, बुवाई, सिंचाई, प्रबंधन, देखभाल, पैदावार
पालक की खेती (Spinach farming) का हरी सब्जी फसलों में विशेष स्थान है| देश के लगभग सभी भागों में रबी, खरीफ एवं जायद तीनों मौसम में इसकी खेती की जाती है| देशी तथा विलायती दो प्रकार की पालक अलग-अलग क्षेत्रों में उगाई जाती है| देशी पालक की पत्तियाँ चिकनी अंडाकार, छोटी एवं सीधी होती है| [Read More] …





