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बाजरा पेनिसिटम ग्लूकम की खेती: किस्में, बुवाई, देखभाल, उत्पादन

December 31, 2024 by Bhupender Choudhary Leave a Comment

बाजरा पेनिसिटम ग्लूकोमा की फसल दाने तथा हरे चारे के लिए भारत के विभिन्न क्षेत्रों में सफलतापूर्वक उगाई जाती है| ऐसे क्षेत्र जहां कम वर्षा और ज्यादा गर्मी पड़ती है, बाजरा पेनिसिटम ग्लूकम बाजरे की फसल अच्छी पैदावार देती है| इसको पशुओं को हरे चारे, कड़बी एवं सायलेज या “हे” के रूप में संरक्षित करके खिलाया जाता है| इस लेख में बाजरा पेनिसिटम ग्लूकम की खेती का उपयोग, देखभाल एवं पैदावार का उल्लेख किया गया है|

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बाजरा पेनिसिटम ग्लूकम की खेती के लिए भूमि और तैयारी

बाजरा पेनिसिटम ग्लूकम के लिए अच्छे जल निकास युक्त बलुई दोमट या दोमट भूमि बाजरे की खेती के लिए सर्वोत्तम मानी गई है| पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से और दो जुताई हैरो या देशी हल से तथा अंतिम जुताई के बाद पाटा लगाकर बाजरे की बुवाई के लिए खेत तैयार करना चाहिए|

बाजरा पेनिसिटम ग्लूकम की खेती की बुवाई का समय

बाजरा पेनिसिटम ग्लूकम हेतु सिंचित क्षेत्रों में गर्मियों में बुवाई के लिए मार्च से मध्य अप्रैल का समय उपयुक्त हैं| खरीफ की फसल के लिए जुलाई का प्रथम पखवाड़ा उपयुक्त है| भारत में कई जगहों पर अक्टूबर से नवम्बर में बुवाई रबी के मौसम में की जाती है|

बाजरा पेनिसिटम ग्लूकम की खेती के लिए उन्नत किस्में

पेनिसिटम ग्लूकम की अधिक उपज प्राप्त करने के लिए अच्छी किस्म का चुनाव आवश्यक हो जाता है| उद्देश्य के अनुसार किस्म का चयन करना चाहिए, जैसे-

एकल कटाई- राज बाजरा चरी- 2, नरेन्द्र चारा बाजरा- 2

बहु कटाई- जायंट बाजरा, प्रो एग्रो नं- 1

चारे एवं दाने वाली- ए वी के बी- 19

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बाजरा पेनिसिटम ग्लूकम की खेती के लिए बीज दर और बुवाई

बाजरा पेनिसिटम ग्लूकम के उत्तम उत्पादन हेतु 10 से 12 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से बीज उपयोग करना चाहिए| बीज की बुवाई हल के पीछे या सीडड्रिल से 25 सेंटीमीटर दूरी वाली पंक्तियों में 2 सेंटीमीटर गहराई पर करें| कवक रोगों से बचाने के लिए बीज को एग्रोसान जी एन या थीरम 3 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज दर से अवश्य उपचारित करना चाहिए|

बाजरा पेनिसिटम ग्लूकम की खेती में खाद और उर्वरक

बाजरा पेनिसिटम ग्लूकम की सिंचित दशा में फसल की समुचित पोषक आवश्यकता पूरी करने के लिए 10 टन प्रति हेक्टेयर अच्छी सड़ी गोबर की खाद बुवाई के 20 दिन पहले खेत में मिला दें और 50:30:30 किलो ग्राम नत्रजन, फास्फोरस, पोटाश प्रति हेक्टेयर बुवाई के समय देना चाहिए|

30 किलोग्राम नत्रजन प्रति हेक्टेयर बुवाई के एक महीने बाद छिड़काव करना चाहिए| असिंचित दशा में बुवाई के समय उपयुक्त खाद और उर्वरक के अतिरिक्त वर्षा होने पर 20 से 30 किलो ग्राम प्रति हेक्टेयर नत्रजन का छिड़काव 30 से 35 दिन की अवस्था पर करना लाभदायक रहता है|

बाजरा पेनिसिटम ग्लूकम की खेती में खरपतवार नियंत्रण

पेनिसिटम ग्लूकम मैं 25 से 30 दिन की अवस्था पर वीडर कम कल्चर से एक गुड़ाई करनी चाहिए या बीज के जमाव से पूर्व बुवाई के 2 से 3 दिन के अन्दर एट्राजिन खरपतवार नाशी 0.50 से 0.75 किलोग्राम सक्रिय तत्व प्रति हेक्टर की दर से 500 लीटर पानी में मिलाकर छिड़कना खरपतवारों के नियंत्रण में सहायक होता है|

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बाजरा पेनिसिटम ग्लूकम की खेती में सिंचाई प्रबंधन

बाजरा पेनिसिटम ग्लूकम खरीफ की फसल में वर्षा न होने पर 2 सिंचाई की आवश्यकता होती है| सिंचाई 20 से 21 दिन के अंतराल पर करने से उपज में अधिकतम वृद्धि होती है| ग्रीष्म ऋतु में 12 से 14 दिन के अन्तराल पर 4 से 5 सिंचाई की आवश्यकता होती है|

बाजरा पेनिसिटम ग्लूकम की खेती में कीट और रोग नियंत्रण

पेनिसिटम ग्लूकम की अरगट, डाउनी मिल्ड्यू और स्मट इसकी प्रमुख रोग है| मेटालेक्सिल 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज एवं फसल में कीडोमिल 1000 पी पी एम का छिड़काव समुचित नियंत्रण देता है| अरगट या स्मट से प्रभावित बालियों को निकालकर जला देना चाहिए| शूट फ्लाई कीट नियंत्रण के लिए कार्बोफ्यूरॉन 125 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर का छिड़काव लाभकारी पाया गया है|

बाजरा पेनिसिटम ग्लूकम फसल की कटाई और पैदावार

पेनिसिटम ग्लूकम की एक कटाई वाली किस्मों में बुवाई के 60 से 75 दिन बाद 50 प्रतिशत फूल अवस्था पर कटाई करें| एकल कटाई में 300 से 400 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हरा चारा आसानी से प्राप्त होता है| बहु कटाई वाली किस्मों में पहली कटाई 40 से 45 दिन पर और उसके बाद की कटाई 30 दिनों के अंतराल पर करें| बहुकटाई किस्मों से 550 से 1000 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हरा चारा पैदावार प्राप्त की जा सकती है|

बाजरा पेनिसिटम ग्लूकम फसल की उपयोगिता

पेनिसिटम ग्लूकम का चारा कोमल एवं सुपाच्य होता है| इसमें 7 से 10 प्रतिशत क्रूड प्रोटीन, 56 से 64 प्रतिशत एन डी एफ, 38 से 40 प्रतिशत ए डी एफ 33 से 34 प्रतिशत सेल्यूलोज और 18 से 23 प्रतिशत हेमीसेल्यूलोज पाया जाता है| मई से अक्टूबर तक हरे चारे की उपलब्धता बनी रहती है| बाजरे से अच्छी गुणवत्ता वाला ‘हे’ भी तैयार किया जा सकता है|

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प्रिय पाठ्कों से अनुरोध है, की यदि वे उपरोक्त जानकारी से संतुष्ट है, तो अपनी प्रतिक्रिया के लिए “दैनिक जाग्रति” को Comment कर सकते है, आपकी प्रतिक्रिया का हमें इंतजार रहेगा, ये आपका अपना मंच है, लेख पसंद आने पर Share और Like जरुर करें|

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