शीतदंश (Frost Bite)

शीतदंश (Frost Bite) क्या है, इसके के कारण, लक्षण और उपचार

शीतदंश शरीर के उतक आमतौर पर त्वचा की ठण्ड को संदर्भित करता है, शीतदंश जिसके परिणाम स्वरूप रक्त वाहिकाओं के अनुबंध, रक्त के प्रवाह को कम करने और शरीर के अंगों का ऑक्सीजन कम करने का परिणाम होता है| सामान्य सनसनी खो जाती है, और इन परिवर्तनों में रंग परिवर्तन भी होते है|

शीतदंश से शरीर के हिस्सों को दूर करने की सबसे अधिक संभावना है, जो शरीर के मुख्य भाग से दूर है| और इसीलिए कम रक्त संचार होता है, इसमें आपके हाथ की अंगुली, पैर की अंगुली, पैर, नाक और कान शामिल है|

ठण्ड की चोट की तीन डिग्री शामिल है, फ्रोस्टनिप, सतही हिमखंड और गहरा हिम शैल, यदपि बच्चों वृद्ध लोगों और परिसंचारी समस्या वाले लोगों को हिमशोथ के लिए अधिक जोखिम होता है| यह ज्यादातर मामलों में 30 से 49 के बिच के वयस्कों में होता है|

यदि आप शीतदंश विकसित करते है, तो आपको पहले से महसूस नही हो सकता है, की कुछ भी गलत हो रहा है| क्योंकि प्रभावित क्षेत्र सुन हो सकता है| तत्काल चिकित्सा ध्यान के साथ ज्यादातर लोग शीतदंश से पूरी तरह ठीक हो जाते है, हालाँकि यदि यह गंभीर है, तो स्थाई क्षति संभव है, की कितनी देर तक उतक जमी हुई गहराई के आधार पर संभव है|

गंभीर मामलों में प्रभावित क्षेत्र में रक्त प्रवाह बंद हो सकता है, और रक्त वाहिकाओं, तंत्रिकाओं, मांसपेशियों और हड्डियों को स्थाई रूप से क्षतिग्रस्त किया जा सकता है| यदि जमी हुई उतक मर जाता है, तो प्रभावित क्षेत्र को विच्छेद करने की आवश्यकता हो सकती है|

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शीतदंश के लिए जोखिम

निम्नलिखित परिस्थितियों में ठण्ड का मौषम होने पर आपको हिमशोथ हो सकता है, जैसे-

1. यदि आपने ठण्ड की स्थिति के अनुसार कपड़े नही पहने हुए है|

2. आपका शरीर थकान, निर्जलीकरण, शारीरिक श्रम, चोट या शराब के कारण शरीर में कमजोरी, जिसके कारण हिमशोथ को आगे बढ़ने में मदद मिलती है|

3. यदि आप मधुमेह, अवसाद, ह्रदय रोग या परिधीय संवहनी रोग जैसी चिकित्सा स्थितियों से पीड़ित है, तो भी आप इस समस्या से पीड़ित हो सकते है|

4. यदि आप वीटा अवरोधक दवाएं लेते है|

5. युवा बच्चों और बुजर्गों को भी हिमशोथ से ग्रस्त होने की अधिक संभावना रहती है|

शीतदंश के लक्षण 

हिमशोथ के अधिकांश मामलों में निम्नलिखित लक्षण शामिल है, जैसे-

1. त्वचा काटेदार या सुन महसूस होती है|

2. त्वचा अपना रंग परिवर्तन कर सकती है, जैसे लाल, सफेद, पिला या भूरा|

3. उजागर क्षेत्र के आसपास दर्द हो सकता है|

4. त्वचा पर फफोले हो सकते है|

5. त्वचा काली पड़ सकती है|

6. जोड़े और मस्पेशियाँ कार्य नही कर रहे है|

7. बुखार, चक्कर आना, सुजन, लाली, या ठण्ड क्षेत्र में कुछ महसूस न होना|

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हिमशोथ का निदान

हिमशोथ के अधिकांश मामलों का एक शारीरिक परिक्षण के आधार पर निदान किया जाता है, लेकिन चिकित्सक के लिए आपका विवरण, कब कहाँ और कैसे हिमशोथ हुआ जानना आवश्यक होता है| यदि हिमशोथ गंभीर है, एक्सरे या हड्डी स्कैन का इस्तेमाल हड्डी और मांसपेशियों के नुकसान को पहचाने के लिए किया जा सकता है|

शीतदंश का इलाज

तत्काल प्राथमिक उपचार के लिए निम्नलिखित तरीके अपना सकते है, जैसे-

1. शीत से छुटकारा पाने के लिए गर्म स्थान ढूंढे|

2. अपने बाहों में निचे टीकाकार रोगी की मालिश करें|

3. यदि संभव हो तो घर में ले जाकर अतिरिक्त कपड़े और अन्य अनावश्क वस्तु हटा दे|

4. रोगी को गर्म कम्बल से ढककर, उसके पैर या हाथ गर्म पानी में रख सकते है|

5. गर्मी के स्रोतों से बचें, जैसे दीपक, आग या हिटिंग ये रोगी की त्वचा को नुकसान पहुचा सकते है|

6. यदि आपको लगता है, की रोगी निर्जलित है, तो उसको गर्म पे पिलाएं|

7. आप पानी से प्रभावित क्षेत्रों को गर्म कर के हिमशोथ के ज्यादातर मामलों का इलाज कर सकते है, एक चिकित्सक भी प्रभावित जगह पर गर्म पत्ती बांध सकता है| यदि आपकी त्वचा संक्रमित है, तो चिकित्सक आपको एंटीबायोटिक दवा का सुझाव दे सकता है|

8. सबसे चरम मामलों में हड्डी मांसपेशियों, और नशों को नुकसान का अनुभव, इसके लिए विच्छेद की सर्जरी आवश्यक हो सकती है| चिकित्सक थंबोलाइटिक्स नामक दवाओं के साथ उतकों की मरमत करने का प्रयास कर सकते है| ये दवाएं रक्तस्राव का कारण बन सकती है, और आमतौर पर विच्छेद से बचने का अंतिम उपाय होता है|

9. रोगी को जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी चिकित्सा के लिए ले जाएं|

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जटिलताएँ (Complications)

अत्यधिक शीत के आपके शरीर की प्राकृतिक प्रतिक्रिया आपके दिल और फेफड़ों को खून का निर्देशन करना है| इन अंगों को गर्म रखने से हैपोथ्र्मियाँ को रोकता है| हैपोथ्र्मियाँ तब होता है, जब आपका शरीर ठंड से आपने आपको बचाने के लिए पर्याप्त गर्मी का उत्पादन नही करता है|

हिमशोथ या शीतदंश का इलाज करने से पहले आपको हैपोथ्र्मियाँ का इलाज करवाना चाहिए, जबकि हिमशोथ दर्दनाक है, और प्रभावित क्षेत्रों में स्थाई नुकसान हो सकता है| हैपोथ्र्मियाँ एक अधिक ठण्ड की धमकी है| आपके पैरों और बाँहों पर हिमशोथ हैपोथ्र्मियाँ के संकेत हो सकते है| क्योंकि हिमशोथ के प्रसार के लिए कुछ समय लगता है| यह आमतौर पर आपके पैर की अंगुली, नाक, कान, गाल और ठोड़ी पर होती है|

शीतदंश को रोका कैसे जा सकता है

सबसे अच्छा काम आप हिमशोथ को रोकने के लिए कर सकते है, ठंडे मौषम के लिए उपयुक्त पोशाक पहननी चाहिए| बहार जाने से पहले मौषम के पूर्वानुमान से अवगत रहें| और जब मौषम जीरो डिग्री हो तो घर से न निकले|

यदि आप ठण्ड के मौषम में बहार रहने की योजना बनाते है, तो कपड़े की कई परते पहनना सुनिश्चित करें| की आपकी त्वचा कही से भी उजागर न हो| आपके कपड़ो को ढीला और पानी रोधक होना चाहिए|

कभी कभी आप हिमशोथ की आशंका नही कर सकते है, आपको दस्ताने, कंबल और टोपी अपने साथ रखने चाहिए, तैयार रहने से आपको सुरक्षित रहने में मदद मिलती है|

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