लासिका ग्रंथिशोथ

लासिका ग्रंथिशोथ (Adenitis) रोग- कारण, लक्षण, और उपचार

लासिका ग्रंथिशोथ एक ऐसी स्थिति है, जो अक्सर बच्चों और किशोरों को प्रभावित करती है| यह पेट के अंदर लिम्फ नोड्स में सूजन का कारण बनता है, लिम्फ नोड्स छोटे बीन आकार के अंग होते है| जिनमें लिम्फोसाइटों श्वेत रक्त कोशिकाएं होती है| वे आपके शरीर की लासिका प्रणाली का हिसा है लिम्फ नोड्स प्रतीक्षा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है|

वे लसिका तरल पदार्थ से वैक्टीरिया और अन्य रोगाणुओं को छानते है, ताकि आपका शरीर उन हानिकारक पदार्थों को शरीर से निकाल सके| लासिका ग्रंथिशोथ अन्त्रपेसी नामक उत्तक में लिम्फ नोड्स को प्रभावित करती है| यह उत्तक आंतो को पेट की दीवार से जोड़ता है| लासिका ग्रंथिशोथ के लिए एक अन्य नाम अन्त्रपेसी लिम्फाडेनिटीस है|

रोग के लक्षण

इस रोग के लक्षणों में निम्न प्रकार शामिल हो सकते है, जैसे- 

1. पेट के निचले दाएं हिस्से में दर्द या पेट के अन्य भागों में दर्द|

2. मतली व उल्टी और दस्त का लगना|

3. तीव्र या हल्की बुखार का होना|

4. शरीर के वजन का घटना|

ये लक्षण आपके बच्चे के ठंड या अन्य श्वसन संक्रमण के बाद दिखाई दे सकते है|

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ग्रंथिशोथ व पथरी

1. लासिका ग्रंथिशोथ व पथरी के समान लक्षण होते है| परिशिष्ट में सुजन पथरी पेटी के निचले दाएं हिस्से में, ब्रहदान्त्र के सिकम में छोटी थैली में होती है| कभी कभी दो स्थितियां अलग अलग हो सकती है|

2. लासिका ग्रंथिशोथ में दर्द आपके बच्चे के पेट के अन्य भागो में भी हो सकता है| लक्षण ठण्ड या अन्य वायरल संक्रमण के बाद शुरू हो सकता है| पथरी आमतौर पर अचानक अपना प्रभाव दिखाती है| पहले चाहे अन्य कोई बीमारी न हो|

3. मुख्य अंतर यह है की लासिका ग्रंथिशोथ पथरी से कम गंभीर है| यह आमतौर पर अपने दम पर बेहतर हो जाता है| परिशिष्ट को हटाने के लिए आमतौर पर पथरी की सर्जरी की आवश्यकता होती है|

इस रोग के कारण

1. पेट के फ्लू या पेट में किसी अन्य संक्रमण के कारण अन्त्रपेसी में और आस पास में सुजन और सूजी हुई लिम्स नोड्स हो सकती है| फिर यह उत्तक है, जो पेट की दीवार के लिए आपकी आंतो को जोडता है|

2. जब आप संक्रमण वैक्टीरिया वायरस या अन्य रोगाणुओं को अपने लासिका नोड्स के माध्यम से फिल्टर करते है| तो उनमे सुजन और बढ़ जाती है| लिम्स नोड्स शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया का हिस्सा है, वे वैक्टीरिया वायरस और अन्य रोगाणुओं को पकड़ते है, और उनको अपने सिस्टम से बाहर निकाल देते है| की आप को बीमारियों से बचाया जा सके| यही कारण है की जब आप बीमार हो जाते है| तो आपको कभी भी अपनी गर्दन या अन्य स्थानों में बढ़े हुए सुजन लिम्फ नोड्स महसूस हो जाएगा| 

3. जीवाणु, परजीवी और वायरस भी इस स्थिति का कारण बन सकते है|

4. लासिका ग्रंथिशोथ अक्सर वायरल आंत्रशोथ के बाद देखा जाता है, जिससे पेट फ्लू कहा जाता है|श्वसन संक्रमण के बाद भी आपका बच्चा इस स्थिति को प्राप्त कर सकता है| कुछ बच्चो को अंडरकुक्ड पोर्क खाने से यह रोग हो सकता है| जो की जीवाणु यिरसिनिया एन्स्पोलाइटिका के साथ दूषित हो चूका है|

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निदान कैसे किया जाता है

1. डॉक्टर आपके बच्चे के लक्षणों के बारें में पूछेंगे, वह यह भी पूछेंगे की हालही में आपके बच्चे के पेट की बगल दर्द या संक्रमण था या नही| डॉक्टर किसी भी कोमलता या सुजन की जांच करने के लिए पेट को चेक कर सकता है| यह जानने के लिए की क्या लिम्फ नोड्स बढ़े है|

2. संक्रमण की चिकित्सा के लिए डॉक्टर आपके बच्चे के रक्त का नमूना ले सकता है| पेट में बढ़े लिम्फ नोड्स को देखने के लिए आपके बच्चे की इमेजिंग टेस्ट की आवश्यकता हो सकती है| 

3. लसिका ग्रंथिशोथ और पथरी का अंतर जानने के लिए सीटी स्कैन टेस्ट की भी आवश्यकता पड़ सकती है|

इलाज (Treatment)

1. लासिका ग्रंथिशोध आमतौर पर इलाज के बिना कुछ दिनों में ठीक हो जाता है| जिन बच्चो को वैक्टीरियल संक्रमण होता है| उन्हें एंटीबायोटिक उपचार लेने की आवश्यकता पड़ सकती है|

2. अपने बच्चे को आराम से रखने के लिए आप दर्द रिलेवर जैसे आईबुप्रोफेन (एडविल, मोट्रीन) या एसीटामिनोफेन (टाईलेनोल) दे सकते है| फ्लू जैसे लक्षण वाले बच्चों को एस्पिरिन न दे, एस्पिरिन को एक दुर्लभ, लेकिन एक गंभीर स्थिति से जोड़ा गया है| जिससे बच्चों और किशोरों में रेये सिंड्रोम कहा गया है|

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जटिलता (Complication)

यह रोग हालाँकि गंभीर नही है, लेकिन कभी कभी यह जटिलताओं का कारण बन सकता है, जैसे-

1. फोड़ा, जो पेट में एक मवाद की जेब है|

2. निर्जलीकरण, यदि आपके बच्चे को गंभीर उल्टी या दस्त है|

3. पेरिटोनिस, एक दर्लभ स्थिति जिससे पेट में अंगों के आसपास पेट की झिल्ली की सुजन होती है|सेप्सिस जो एक संक्रमण का परिणाम है| जो सिस्टमिक भडकाऊ प्रतिक्रिया सिंड्रोम के कारण होता है|

यह रोग किसी को भी किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन बच्चों में यह रोग सबसे आम है| 

नोट- किसी भी दवा का प्रयोग करने से पहले चिकित्सक के सलाह जरुर ले नही तो दवा हानिकारक हो सकती है|

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