लकवा या पक्षाघात (Paralysis)

लकवा या पक्षाघात (Paralysis) के कारण, लक्षण, निदान और उपचार

लकवा या पक्षाघात (Paralysis) से मासपेशियों और तंत्रिकाओं के कामकाज के नुकसान का उल्लेख होता है, और आमतौर पर प्रभावित क्षेत्र में संवेदी हानी होती है| यह आमतौर पर केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र को विशेष रूप से रीढ़ की हड्डी को नुकसान पहुचता है| कारणों में स्टोक, आघात, तंत्रिका क्षति, पोलियो और मल्टीपल स्क्लेरोसिस शामिल है|

पक्षाघात (Paralysis) आंशिक या पूरी तरह से हो सकता है| आधे पक्ष को पेरोपगैया कहा जाता है, और दोनों हाथो और पैरो के पक्षाघात को चतुरांगघात कहा जाता है| एस इसलिए होता है, की मस्तिष्क विभिन्न कारणों से शरीर के विभिन्न भागों में संदेश नही भेज सकता है| यदि तंत्रिका फाइबर क्षतिग्रस्त हो जाते है, तो लकवा या पक्षाघात अपरिवर्तनीय होते है|

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लकवा या पक्षाघात के कारण

आकड़ो के अनुसार, विश्व में 50 लोगों में से एक व्यक्ति का पता चलता है, की वह किसी भी प्रकार के लकवा से पीड़ित है|  पक्षाघात (Paralysis) मुख्य रूप से निम्नलिखित स्थितियों का कारण हो सकता है|

स्टोक- सभी पक्षाघात के लगभग 30 प्रतिशत स्टोक की वजह से होते है, स्टोक के लकवा में शामिल है, जैसे-

अर्धाघात (एक तरफा लकवा)

हैमिपरैसिस (जो की शरीर के एक तरफ जाने के लिए कमजोरी या अक्षमता)

चक्कर (कमजोर या कठोर मासपेशियों)

डिस्फागीय (गले की परेशानी अर्थात कुछ निगला न जाना)

फूट ड्राप (पैर के सामने के हिस्से को उठाने में असमर्थता)

रीढ़ की हड्डी की चोट- स्टोक के बाद यह पक्षाघात का सबसे बढ़ा कारण है, काम की वजह, दुर्घटनाओं, खेल, गिरने, जन्म दोष, हिंसा का शिकार, प्राकृतिक आपदाओं और कई अन्य ज्ञात और अज्ञात कारणों के कारण रीढ़ की हड्डी की चोट हो सकती है|

मल्टीपल स्केल्रोसिस- मल्टीपल स्केल्रोसिस केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र का एक पुराना विकार है, यदपि यह हमेशा पक्षाघात का कारण नही बनता है| इस से प्रभावित अधिकांश लोगो को थकान, कमजोर मांसपेशियों या संतुलन समस्याओं के कारण व्हीलचेयर या बैशाखी जैसी गतिशील चीजों की आवश्यकता होगी|

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मस्तिष्क लकवा- यह मस्तिष्क पक्षघात होता है, यह न्यूरोडीजेनेरेटीव विकार है, जो असामान्य विकास या मस्तिष्क के कुछ हिस्सों के परिणाम स्वरूप होता है| जो की नियंत्रण संचार को नियंत्रित करता है|

पोस्ट पोलियो सिंड्रोम- यह एक एसी स्थिति है, जो पोलियो से प्रभावित लोगो को अपनी चपेट में लेती है| सिंड्रोम प्रारम्भिक पोलियो हमले के बाद के वर्षों में हो सकता है| स्नायु की कमी और थकान सिंड्रोम लकवा के लक्षण है| इसका कारण अज्ञात है, लेकिन विशेषज्ञों का माना है, की वायरस, तंत्रिका कोशिकाओं की थकान या मस्तिष्क क्षति के कारण सिंड्रोम हो सकता है|

न्यूरोफैब्रोमैटोसिस- यह अनुवांशिक विकार है, जो ट्यूमर के नशों के आसपास बढ़ने के कारण होता है| नसें क्षतिग्रस्त होने से लकवा हो सकता है| आमतौर पर ट्यूमर घातक हो सकते है और कैंसर पैदा कर सकते है|

मस्तिष्क की चोट- मस्तिष्क की चोट के कारण भी पक्षाघात हो सकता है, यह तब होता है, जब सिर पर अचानक और हिंसक रूप से कोई वस्तु मरता है, या किसी दुर्घटना में सिर लगता है, तब ऐसे चोटों से अनुवांशिक और स्थाई पक्षाघात हो सकता है|

लकवा के लक्षण

पक्षाघात (Paralysis) के लक्षण में मांसपेशियों की ऐठन , असहमति, और कमजोरी महसूस हो सकती है, यह वास्तव में ही पुरे शरीर का नुकसान है| जो लकवा के रूप में समझा जाता है| लकवा शरीर के एक हिस्से, पुरे शरीर, उपरे हिस्से या फिर सिर्फ पैरो को प्रभावित कर सकता है| यह कभी कभी आँखों को छोडकर पुरे शरीर को भी प्रभावित कर सकता है, कुछ अन्य लक्षण है, जिनके कारण लकवा हो सकता है, जैसे-

1. चेतना का नुकसान या भ्रम|

2. चक्कर और सूनापन|

3. सांस लेने में तकलीफ|

4. मुह से अनियंत्रित लार टपकना|

5. संज्ञात्मक कठिनाई, जैसे लिखने या बोलने में कठिनाई|

6. मुड़ या व्यवहार में परिवर्तन|

7. मूत्राशय या आंत्र नियन्त्रण की हानी|

8. दृष्टि में हानी, या सुनाई न देना|

9. उल्टी के साथ या इसके बिना मितली|

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लकवा का निदान

पक्षाघात (Paralysis) के निदान में चिकित्सक का पहला कदम आपका परिक्षण करना हो सकता है, इसके बाद चिकित्सक लक्षण और आपके इतिहास की जानकारी ले सकते है| इसके बाद वह लक्षणों के आधार पर निदान शुरू कर सकते है, जैसे स्टोक के बाद लकवा है तो चिकित्सक इसकी पूर्ण समस्या को जानने के लिए कुछ परीक्षणों का सुझाव दे सकता है, जो इस प्रकार है, जैसे-

1. एक्सरे

2. सीटी स्कैन (कंप्यूटर टोमोग्राफी)

3. एमआरआई स्कैन (चुम्बकीय अनुनाद तस्वीर)

4. इलेक्ट्रोमोग्राफी (आमतौर पर बेल के पक्षाघात का निदान करने के लिए किया जाता है)

5. यदि आवश्यक हो तो मरीज को एक स्नायु विशेषज्ञ के पास भी भेजा जा सकता है|

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 पक्षाघात का इलाज

आप जानना चाहते होंगे की क्या लकवा का इलाज संभव है, तो चिकित्सक का जबाब हाँ और नही हो सकता है, शोधकर्ताओं और पेशेवर विशेषज्ञों को विश्वास है की कुछ प्रकार के पक्षाघात के साथ आंशिक या पुर्नप्राप्ति संभव है|

चाहे वह स्टोक, रीढ़ की हड्डी की चोट, पोलियो या उपचार और वसूली तकनीकों से पक्षाघात है| आमतौर पर शरीर और मस्तिष्क का कनेक्शन बहाल करना लकवा का उदेश्य उपचार होता है|

यूरोप के शोधकर्ताओं ने एक पहनने योग्य इलेक्ट्रोनिक उपकरण तैयार किया है, जिससे हाथों और बांहों की मस्पेशियों को सक्रिय करने वाली नशों में कम विधुतीय धाराओं को वितरित कर के हाथ और बाँहों के लकवा को ठीक करने में मदद मिलती है|

तो इससे हम कह सकते है की बहुत प्रकार के पक्षाघात का इलाज संभव है, और बहुत प्रकार के लिए दुनिया के शोधकर्ता और पेशेवर चिकित्सक प्रयासरत है|

यदि आपको पक्षाघात को कोई लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत चिकित्सक से सलाह ले क्योंकी किसी भी प्रारम्भिक रोग का इलाज जल्दी संभव होता है|

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1 thought on “लकवा या पक्षाघात (Paralysis) के कारण, लक्षण, निदान और उपचार”

  1. मैं एक वौइस् ओवर आर्टिस्ट हूँ , आपके लेख को मैं अपनी आवाज़ में पेश करना चाहता हूँ। क्या इसके लिए अनुमति दे सकते है ? मैं क्रेडिट के रूप में दैनिक जागरण और लेखक का नाम भी प्रदर्शित करुगा। आपके प्रतिउत्तर की प्रतीक्षा के साथ। धन्यवाद्।

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